कविता

कुछ मत बोलो

कुछ मत बोलो

दीवारों के भी कान होते हैं -उसने कहा

यदि वृक्ष, तितलियाँ  ,फूल

सुन भी लेंगें तो क्या होगा -मैंने कहा

प्यार के नि :शब्द होता है

उसे अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता -उसने कहा

उसे स्पंदन में ,नसों के भीतर प्रवाहित लहूँ  में

महसूस किया जा सकता है

हमारी आत्मा की देह के रोम रोम को प्यार स्पर्श  करता हैं -उसने कहा

किशोर

किशोर कुमार खोरेंद्र

परिचय - किशोर कुमार खोरेन्द्र जन्म तारीख -०७-१०-१९५४ शिक्षा - बी ए व्यवसाय - भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत एक अधिकारी रूचि- भ्रमण करना ,दोस्त बनाना , काव्य लेखन उपलब्धियाँ - बालार्क नामक कविता संग्रह का सह संपादन और विभिन्न काव्य संकलन की पुस्तकों में कविताओं को शामिल किया गया है add - t-58 sect- 01 extn awanti vihar RAIPUR ,C.G.

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