गजल- लगता हम भी शायर हैं
जब तक हम तनहा थे लगता था दीवारो-दर हैं.
जब से साथ तुम्हारा पाया हमको लगता हम घर हैं.
ऐसी बात कभी मत कहना जिससे दिल पर चोट लगे,
पत्थर जैसे दिखते तो हैं किन्तु नहीं हम पत्थर हैं.
आज हमारी ग़ज़लें खुशबू फैलाती हैं फूलों सी,
तुमने जब से गाया इनको, महके अक्षर-अक्षर हैं.
दिल की बातें होती हैं तो हम कितना खुश हो जाते,
तुम पहले से बेहतर दिखते हम भी दिखते बेहतर हैं.
यों तो मिलती हैं तारीफें हमको अपनी ग़ज़लों पर,
पर जब तुम तारीफ करो तो लगता हम भी शायर हैं.
— डाॅ.कमलेश द्विवेदी
मो.9415474674

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल !
vaah