गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

यूहीं मुस्काते हैं इक अदा से वो आजकल
जैसे चिढ़ाते हैं गरूर मे सबको आजकल
जाने क्या दिल मे है हलचल कोई आजकल
खुद से भी दिखते हैं कभी तो बतियाते आजकल
महफिल की शान कभी कहाने वाले वो मगर
दिखते हैं गुनगुनाते सुनसान सड़को पे भी आजकल |||
कामनी गुप्ता जम्मू ***

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |

6 thoughts on “गज़ल

  • विजय कुमार सिंघल

    वाह !

    • कामनी गुप्ता

      Thanks ji

    • कामनी गुप्ता

      Thanks sirji

  • प्रीति दक्ष

    umda

    • कामनी गुप्ता

      शुक्रिया

    • कामनी गुप्ता

      Thanks ji

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