जरूरी नहीं है
जरूरी नहीं है
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आँखो से पढ़ लूंगी
दिल की किताबें
होठो पे लाना
जरूरी नहीं है
भावनाएं स्पन्दन
लहर बन गई जो
समन्दर मे जाना
जरूरी नहीं है
जलाया है हमने
उम्मीदों का दिया
दियों को जलाना
जरूरी नहीं है
दबाया है मैंने जो
एहसास दिल में
कहकर सुनाना
जरूरी नहीं है
ख्वाबों में ही सही
हम मिलेंगे कभी
मिलना मिलाना
जरूरी नहीं है
यकीं यदि है तो
यकीं पहले कर
यकीं अब दिलाना
जरूरी नहीं है
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© copyright Kiran singh

बहुत खूब
शुक्रिया
अच्छी कविता
हार्दिक आभार