गीतिका/ग़ज़ल

जिन्दगी रोज नया रंग…

जिन्दगी रोज नया रंग, दिखाती हैं मुझे।
फलसफा रोज हकीकत का, सिखाती है मुझे॥

मैं हर एक रात सजाता हूं, ख्वाब खुशियों के।
हर सुबहा दे के नया दर्द, जगाती है मुझे॥

गुरबतो के सफर मे कौन, साथ देता है।
मेरी परछाई भी, अब गैर बताती है मुझे॥

मैं उसूलों को मानता रहा, दौलत मेरी।
दुनियां इस भूल का, अहसास कराती है मुझे॥

बे सबब धडकनें सूकून, ढूंढकर हारी।
मेरी हसरत है कि, दिन रात सताती है मुझे॥

गम सही दर्द सही, नफरतों का दौर सही।
शुक्रिया बंदगी, तू जीना सिखाती है मुझे॥

वो और होंगे जिन्हें, प्यार वतन से प्यार नही।
ये जमीं जान से बढकर, नजर आती है मुझे॥

मेरी तलाश भी होगी, एक दिन पूरी।
मेरी उम्मीद रोज राह, दिखाती है मुझे॥

सतीश बंसल

*सतीश बंसल

पिता का नाम : श्री श्री निवास बंसल जन्म स्थान : ग्राम- घिटौरा, जिला - बागपत (उत्तर प्रदेश) वर्तमान निवास : पंडितवाडी, देहरादून फोन : 09368463261 जन्म तिथि : 02-09-1968 : B.A 1990 CCS University Meerut (UP) लेखन : हिन्दी कविता एवं गीत प्रकाशित पुस्तकें : " गुनगुनांने लगीं खामोशियां" "चलो गुनगुनाएँ" , "कवि नही हूँ मैं", "संस्कार के दीप" एवं "रोशनी के लिए" विषय : सभी सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक, बेटी बचाव, गौ हत्या, प्रकृति, पारिवारिक रिश्ते , आध्यात्मिक, देश भक्ति, वीर रस एवं प्रेम गीत.