गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

देख लेंगे आप मुझको मुस्कुराकर जब कभी ,
रूह को तस्कीन दिल को ताज़गी मिल जाएगी।

आपके मिलने से मुझको यूं खुशी मिल जायेगी,
ज़िन्दगी की राह में कुछ रौशनी मिल जायेगी।

काश ! आकर देख लें वो मेरे दिल की डायरी,
नाम जो उनके लिखी वो शायरी मिल जायेगी।

मंदिरो-मस्जिद में क्या है मैं नहीं कहती हूं कुछ,
झांक कर देखो दिलों में बंदगी मिल जाएगी।

याद की खुशबू से ये सावन हुआ है तरबतर,
पास आओ आप मेरे ज़िन्दगी मिल जायेगी।

दर ब दर भटका किये पर हाथ कुछ आया नही,
गर मिले *शुभदा* तो सब जादूगरी मिल जाएगी।

— शुभदा बाजपेयी
18/11/2015