कविता

सेदोका और हाइकु

सेदोका 5/7/7/5/7/7

^तरौना आस
कृषक-धनि पूरे
धनिया के व्यापार
*धुड़ंगा तरु
नव वस्त्र पहने
वल्ली गले लगाये

^तरौना=कर्णफूल …. *धुड़ंगा = वस्त्रहीन

हाइकु

1:

स्वयं का बैरी
अति जल में लता
दुर्मदी मनु

2:

सफाई कर्मी
आतिथेय वसंत
धुड़ंगा तरु ।

3:

चनिया चोली
भू धारे सतरंगी
रचे रंगोली

4:

रश्मि के साये
पा फूल हुये पीले
भू हल्दी स्नान

 

*विभा रानी श्रीवास्तव

"शिव का शिवत्व विष को धारण करने में है" शिव हूँ या नहीं हूँ लेकिन माँ हूँ

One thought on “सेदोका और हाइकु

  • विजय कुमार सिंघल

    अच्छी रचनायें।

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