गीतिका/ग़ज़ल

दिल चाहता है

दिल चाहता है मंत्रमुग्ध फिजा देख के गीत लिखूं
तुम बिन पड़ा अधूरा आ जाओ तो मनमीत लिखूं
वसंती मस्तियों की हरियालियां पतझड में रोएंगी
मिलन विछोह की इस त्रासदी को कैसी रीत लिखूं
झुलसाती दुपहरी देख बावरे बादल दौङे भागे आएंगे
धरा गगन के इस अदभुत नेह को  कैसी प्रीत लिखूं
बरखा में झूमती भीगी पत्तियां टूट गिर सङ जाएंगी
भीगी धरा में मिल बने कीचङ को कैसे नवनीत लिखूं
शीत की सिहराती वादी गुनगुनी धुप पा कर निखरेगी
घौंसलों से आती नव चहचहाटों को कैसा संगीत लिखूं
हर तरफ प्यार है,वफाएं है, उम्मीदों पे टिका जीवन है
जिस पल को जीती हुं आज भी, क्यूं उसे अतीत लिखूं
खुश है सब तो क्यूं ना हम तुम भी खुश हों ले जीवन में
अंतहीन जो अपनी कहानी, क्यूं  हार लिखूं, जीत लिखूं

मीनू झा

शैक्षिक योग्यता स्नातक (अंग्रेजी) स्नातकोत्तर (एम.बी.ए) (वित्त व मार्केटिंग में विशेषज्ञता) लेखन-रूझान कई भाषण व वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में विजेता-उपविजेता तीन सालों से ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय संपर्क निवेदित कुमार झा,एम एच-309,सी आई एस एफ कॉलोनी,पानीपत रिफाईनरी के निकट,पानीपत,हरियाणा फोन नंबर 9034163857/9570473537

7 thoughts on “दिल चाहता है

  • खुश है सब तो क्यूं ना हम तुम भी खुश हों ले जीवन में

    अंतहीन जो अपनी कहानी,क्यूं हार लिखुं , जीत लिखुं ,,,,,,,,, बहुत मजेदार .

    • मीनू झा

      सादर धन्यवाद आपका

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत खूब !

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत खूब !

    • मीनू झा

      सादर धन्यवाद आदरणीय

  • लोकेश नदीश

    Nice

    • मीनू झा

      बहुत बहुत धन्यवाद

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