कविता

पिता पहचान हैं

Happy Father’s Day

पिता आकाश हैं,
आकाश में धूप हैं,
धूप में कवच हैं.

पिता मित्र हैं,
मित्रों में सुदामा हैं,
पिता ही श्रीकृष्ण हैं.

पिता उपनिषद हैं,
उपनिषदों में कठोपनिषद हैं,
कठोपनिषद में नचिकेता हैं.

पिता विश्वास हैं,
प्रेम के मधुमास हैं,
प्रेम के अहसास हैं.

पिता पहचान हैं,
पिता लुकमान हैं,
पिता के बिना हलकान हैं.

पिता छत्रछाया है,
सृजनहार सरमाया है,
रहस्यमयी साया है.

पिता हर्ष हैं,
विचार-विमर्श हैं,
भटकने लगूं तो परामर्श हैं.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

7 thoughts on “पिता पहचान हैं

  • Man Mohan Kumar Arya

    सुंदर व रहस्य्मय कविता। पिता जन्म देने व पालन करने से कहलाता है। कोई संतान अपने पिता का ऋण शायद कभी नहीं उतार सकती। हार्दिक धन्यवाद। सादर।

  • Man Mohan Kumar Arya

    सुंदर व रहस्य्मय कविता। पिता जन्म देने व पालन करने से कहलाता है। कोई संतान अपने पिता का ऋण शायद कभी नहीं उतार सकती। हार्दिक धन्यवाद। सादर।

    • लीला तिवानी

      प्रिय मनमोहन भाई जी, आपने सच ही कहा है. माता किसी तरह अपनी बात व्यक्त कर देती है, लेकिन पिता की बात अक्सर रहस्य ही रह जाती है-
      ”पिता छत्रछाया है,
      सृजनहार सरमाया है,
      रहस्यमयी साया है.”
      अति सुंदर व सार्थक टिप्पणी के लिए आभार.

      • मनमोहन कुमार आर्य

        हार्दिक धन्यवाद आदरणीय बहिन जी।

        • लीला तिवानी

          प्रिय मनमोहन भाई जी, अति सुंदर व सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

  • लीला बहन ,फादर्ज़ डे की आप को वधाई हो ,कविता बहुत अछि लगी .

    • लीला तिवानी

      प्रिय गुरमैल भाई जी, आपको भी फादर्ज़ डे की बधाई. अति सुंदर व सार्थक प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया.

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