कविता : ना किसी का अंधभक्त हूँ
ना किसी का अंधभक्त हूँ
ना किसी पार्टी विशेष का
मै तो छोटा चारण हूँ
अपने प्यारे भारत देश का
राष्ट्रवाद की जो बात करेगा
उसकी लय मै बोलूगा
गद्दारों का जो नाश करेगा
उसकी जय मै बोलूगा
भ्रष्टाचार की कड़ी धूप में
मोदी जी ने छाव दिया है
दहशत मे हैं काले चेहरे
अबकी ऐसा दाव दिया है
सड़कों और कब्रिस्तान में
नोट पाए जा रहे हैं
फाड़े कुछ जा रहे और
कुछ जलाए जा रहे हैं
जाली नोट छापने वाली
मशीनें बेकार पड़ गयीं
नेताओं की एक बड़ी जमात
सदमे से बीमार पड़ गयीं
उग्रवाद पे लात पड़ी है
रियल स्टेट रो रहा है
फीका अबकी चुनाव रहेगा
यूपी में जो हो रहा है
पाकिस्तान के लिए ये कदम
तेज करेन्ट जैसे होगा
देखना है पत्थरबाजों को
अब पेमेन्ट कैसे होगा
गर्जन – मर्दन यूँ ही रख के
अच्छा परिवेश बना दो मोदी जी
रहे ना कोई बेबस – लाचार
ऐसा देश बना दो मोदी जी
— डॉ० शरदेन्दु कुमार त्रिपाठी
