कविता

हिंद की सेना

खून से लथपथ थी वो भूमि
वीरों ने जहां प्राण गवाएं ।
गर्व से लहराता रहा तिरंगा
जब दुश्मन ने थे शीश झुकाए ।

वो एक-एक बम बरसाते थे
उनके सैंकड़ों मारे जाते थे ।
धरती हुई थी लाल जब
उनके चिथड़े हवा में लहराते थे ।

हिन्द के वीर जवानों से
महंगा पड़ा था उनको वैर ।
लाशों का अम्बार लगाकर
चीख रहे थे देशी शेर ।

मुठ्ठी बंधी हुई थी उनकी
नही तो दुनिया हिला देते ।
पीओके क्या चीज है ‘सनम’
वे कराची हिंद में मिला लेते ।

हिंदी शेरों की एक आजादी
उनको रास न आएगी ।
फिर मिटेगा ऐसे पाकिस्तान
इतिहास भी थड़-थड़ाएगी ।

हवाएं जिसकी गाथा सुनाएं
गंगा कहे जिसकी कहानी है ।
जो सूरज से तपते हैं वे
भारत के वीर बलिदानी हैं ।

वे तेजस्वी हैं ओजस्वी हैं
वीरों में महावीर हैं ।
भारतीय सेना तुम्हे नमन
तुम्हारे शान में नत मेरा सिर है ।

मुकेश सिंह
सिलापथार (असम)
मो०- 9706838045

मुकेश सिंह

परिचय: अपनी पसंद को लेखनी बनाने वाले मुकेश सिंह असम के सिलापथार में बसे हुए हैंl आपका जन्म १९८८ में हुआ हैl शिक्षा स्नातक(राजनीति विज्ञान) है और अब तक विभिन्न राष्ट्रीय-प्रादेशिक पत्र-पत्रिकाओं में अस्सी से अधिक कविताएं व अनेक लेख प्रकाशित हुए हैंl तीन ई-बुक्स भी प्रकाशित हुई हैं। आप अलग-अलग मुद्दों पर कलम चलाते रहते हैंl