कविता

प्यारी-प्यारी-प्यारी बेटियां

अखियों का नूर होती हैं प्यारी-प्यारी-प्यारी बेटियां

दिल का सुरूर होती हैं प्यारी-प्यारी-प्यारी बेटियां

अगर उसको अच्छे-से संस्कार दिए जाएं तो

देश का गुरूर होती हैं प्यारी-प्यारी-प्यारी बेटियां.

बेटे को एक ही कुल का दीपक कहा जाता है

दो-दो कुलों का उजियार होती हैं प्यारी-प्यारी-प्यारी बेटियां

माता-पिता के दिल का हाल बिना बताए जानने वाली

हमदर्दी की सुरीली झनकार होती हैं प्यारी-प्यारी-प्यारी बेटियां.

अक्सर ज़माने में लड़कों को कहते सुना जाता है कि

उनसे ही चलती है इश्क की सुहानी-निराली दुनिया

लेकिन उनको माशूकाएं और दुल्हनें कैसे मिल पाएंगी

अगर होंगी ही नहीं प्यारी-प्यारी-प्यारी बेटियां.

चाहे कहीं भी हों उनके अभिभावकों को

हर पल याद होती हैं प्यारी-प्यारी-प्यारी बेटियां

लेकिन जिस दिन उनका जन्मदिन हो

बहुत-बहुत-बहुत याद आती हैं प्यारी-प्यारी-प्यारी बेटियां.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244