कविता

पापा

दिखाते नही वो करते हैं
हर समय तत्पर रहते हैं
अपने लिये नही वो
बच्चो के लिये जीते हैं
वो कोई और नही पापा ही तो हैं

सर्दियो में कॉपते हुये
गर्मियो मे पसीना बहाते हुये
कठिन से कठिन काम कर के
पढाने के लिये पैसे इकट्ठे करते है ं
वो कोई और नही………..

अपने भूखो को मारकर
अपने आकांक्षाओ को दबाकर
शाम को जब घर आते तो
झोला भर खाने को लाते है
वो कोई और नही….

पहाड़ सा सहनशीलता
धरती सा धैर्यवान
चाहे दर्द हजार हो अंदर लेकिन
मुखमंडल पर एक अलग मुस्कान
वो कोई और नही….

उनके डॉटो मे प्यार
उनके मारो मे आशिर्वाद
उनके जैसा नही कोई भगवान
है वो सबसे महान
वो कोई और नही……
निवेदिता चतुर्वेदी निव्या

निवेदिता चतुर्वेदी

बी.एसी. शौक ---- लेखन पता --चेनारी ,सासाराम ,रोहतास ,बिहार , ८२११०४