गीतिका/ग़ज़ल

बदल गया

लोग बदल गये हैं ,लोगों का मिजाज़ बदल गया है
पैसा हर जख्म की दवाई,जीने का रिवाज बदल गया है

सड़को पर बिलखता बचपन, शहरों का आकार बदल गया है
मोल लग जाता है इंसा का यहाँ, रहनुमाओं का विचार बदल गया है

अकेले रहने वालों का हुजूम, सिरहाने रखा ख्याल बदल गया है
जवाब तो था मेरी जेब में,अब सामने वालो का सवाल बदल गया है

 

प्रवीण माटी

नाम -प्रवीण माटी गाँव- नौरंगाबाद डाकघर-बामला,भिवानी 127021 हरियाणा मकान नं-100 9873845733

One thought on “बदल गया

  • कुमार अरविन्द

    जबरदस्त

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