लघुकथा

अपना घर

‘मैं अपना घर छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा,’ 68 वर्षीय कृषक सीए गणपति ने खुद से यह वादा किया था- ‘मैंने अपना घर बहुत ही अरमानों से बनाया था। मैंने तय किया कि मैं इसे छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा, भले ही मेरा घर तबाह हो जाए या मैं.’

कर्नाटकः तबाही में समाया पूरा गांव, सब जान बचाकर भागे….तब भी एक व्यक्ति गणपति ने नहीं छोड़ा अपना घर. गणपति ने 1987 में यहां अपना घर बनवाया था.

14 अगस्त को तेज बारिश हो रही थी. हर तरफ तबाही मची थी. लगातार भूस्खलन हो रहा था. शाम को लगभग पांच बजे थे. लोग गणपति के घर पहुंचे और उसे मनाने का प्रयास किया कि वह अपना घर छोड़ दें. 16 अगस्त की सुबह गणपति ने तेज आवाज सुनी.

एक हफ्ते पहले गांव में आई रेस्क्यू टीम को भी गणपति ने यही जवाब दिया. यहां तक कि उनके अपने भाई सीए करिअप्पा गांव छोड़कर चले गए और गणपति ने उनकी भी बात नहीं सुनी.

गणपति अब भी उस भयंकर मंजर को याद कर सिहर उठते हैं, ‘आवाज सुनकर मैं घर से बाहर आया. मुझे पहले लगा कि शायद मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी हेलिकॉप्टर से हवाई सर्वे कर रहे हैं, लेकिन बाहर आकर देखा कि मेरे घर के बाहर बहुत बड़ा भूस्खलन हुआ था. यह खुशकिस्मती थी कि यह भूस्खलन मेरे तीन एकड़ कृषि भूमि की ओर हुआ.’

‘इसी दिन दोपहर ढाई बजे एक दूसरा भूस्खलन मेरी आंखों के सामने हुआ. मुझे लगा कि अब मैं और मेरा घर नहीं बचेगा, लेकिन भगवान ने एक बार फिर हम लोगों को बचा लिया. मेरी आंखों के सामने ही कई घर मलबे में दब गए. हमारी तीन एकड़ जमीन बर्बाद हो गई.’

गणपति को याद आता है, कि वह यहीं पैदा हुए और पले-बढ़े. उनकी याद में 1962 में भारी बारिश हुई थी, जिससे पूरा मदिकेरा जिला प्रभावित हुआ था, लेकिन तब भी उनका गांव सुरक्षित रहा. 
‘अब भी परमात्मा रक्षा करेंगे. मैं अपना घर छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा’. वहीं डटे हुए गणपति का कहना है.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

2 thoughts on “अपना घर

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    लीला बहन , गणपति जी के मन की हालत मैं समझ सकता हूँ . बहुत दफा कुदरत की क्रोपी के वक्त इंसान भी सख्त हो जाता है .

  • लीला तिवानी

    कर्नाटक: भूस्खलन में ढह गया घर, गांववालों ने मिलकर खोजे बेटी की शादी के लिए रखे जेवर

    कर्नाटक के मदिकेरी जिले के हट्टीहोले गांव में रहनेवाले 64 वर्षीय उमेश शेट्टी ने अपनी बेटी की शादी के लिए सोने के जेवर खरीदे थे। इन जेवरों को उन्होंने एक लोहे की अलमारी में बंद करके रख दिया, लेकिन कुदरत का कहरा जब टूटा तो उनकी अमानत भी गुम हो गई। भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन में उनका घर तहस-नहस हो गया और उसी के साथ वह अलमारी में चली गई जिसमें बेटी की शादी के लिए जेवर रखे थे। इस मुश्किल समय में गांववालों ने अपना जी-जान एक करके जेवर खोजना शुरू किया और आखिरकार काफी खुदाई के बाद गहने ढूंढ लिए गए।

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