कविता

अपनी मां⚜️🌹*

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अपनी मां जन्नत की नूर होती है
अपनी मां की प्रार्थना प्रिय होती है
अपनी मां त्याग तप की खान होती है,
अपनी मां चारों धामों सी होती है।

अपनी मां प्रेरणा की मूर्ति होती है,
अपनी मां समर्पण की सूरत होती है,
अपनी मां हिमालय से ऊंची होती है,
अपनी मां पतित पावनी गंगा होती है।

अपनी मां परिवार की रीढ़ होती है,
अपनी मां परिवार में संस्कार दात्री होती है,
अपनी मां घर की रौनक होती है,
अपनी मां कुल का मार्गदर्शक होती है।

अपनी मां वैदिक ऋचाएं होती है,
अपनी मां गुरु ग्रंथ की वाणी होती है,
अपनी मां परिवार के धर्म
न्याय के संस्कार देती है,
अपनी मां परिवार की प्रार्थना होती है।

अपनी मां बासन्ती बयार होती है,
अपनी मां ही गुनगुनी धूप सी होती है,
अपनी मां ईश्वर की प्रतिनिधि होती है
अपनी मां ही इस धरा के सारे तीरथ होती है।

हर भारतीय की पांच मां होती है,
धरती,भारत,गंगा,गाय व जन्मदात्री मां,
दूसरों की मां भी अपनी मां ही होती है,
पर सबसे दुलारी अपनी मां होती है।
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कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार
रूद्रप्रयाग उत्तराखंड

कालिका प्रसाद सेमवाल

प्रवक्ता जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, रतूडा़, रुद्रप्रयाग ( उत्तराखण्ड) पिन 246171