लेखविविध

संपादक के नाम पुराने पत्र

संपादक के नाम पुराने पत्र यहाँ प्रस्तुत है–

●महिला किसानों की उपेक्षा घातक….

महिलाओं के प्रति असमानता, भेदभाव, अमानवीय व्यवहार पर श्रीमती मृणाल पांडे का आलेख ‘महिला किसानों की भी सुध लीजिए’ है, जो वास्तविकता के बहुत करीब है । देश की लगभग 60 प्रतिशत आबादी कृषि कार्य में संलग्न है । इसमें पुरुषों के बराबर ही महिलाओं की भागीदारी है । पुरुषों से अधिक मेहनत करने के बावजूद महिला किसानों की उपेक्षा की जाती है । स्वामी विवेकानंद ने कहा था- ‘किसी देश की तरक्की तभी संभव है, जब महिलाओं को भी ऐसे सभी कार्यों में शामिल करें, किंतु उन्हें भी उचित सम्मान और बराबर पारिश्रमिक मिले…. आधी आबादी अथवा महिलाओं के सपने को साकार कर ही भारत की प्रगति के बारे में सोचा जा सकता है।

●फ़िल्म चलने से रोकने की मांग उचित या अनुचित….

वैसे वॉलीवुड में कुछ फिल्में ही हटकर बनती हैं । उनमें भी अप्रत्याशित रूप से ऐसी फिल्मों पर ‘भारत के फ़िल्म प्रमाणन सेंसर बोर्ड’ रोक लगा देती है । हिंदी फिल्म ‘Lipstick under my Burka’, ‘Indu Sarkar’, ‘Padmawat’ इत्यादि के निर्माण और चलने पर रोक लगाना अनुचित है, जो विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खत्म करने जैसा है।

●विभाजन का सच….

पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपने आलेख ‘भारत विभाजन पर व्यर्थ का बहस’ में स्पष्ट किया है कि Dr. फारूक अब्दुल्ला द्वारा यह कहना गलत है कि भारत विभाजन के लिए दोषी पंडित नेहरू और  सरदार पटेल की महत्वाकांक्षा है । यह कहकर डॉ. अब्दुल्ला ने मो. अली जिन्नाह के कारनामे को नज़रअंदाज़ किया है । मो. जिन्नाह ने ‘दो राष्ट्र का सिद्धांत’ देकर हिन्दू और मुसलमानों के बीच दूरी पैदा किया था । उन्होंने मुसलमानों को भड़काया कि उनके सच्चे हिमायती हिन्दू नेता नहीं हो सकते । फिर उनका विकास अलग इस्लामिक राष्ट्र बनाकर ही संभव है । तब भारतीय मुसलमान अलग राष्ट्र के लिए सपने देखने लगे थे । इसप्रकार विभाजन के लिए पंडित नेहरू और सरदार पटेल को दोषी नहीं ठहराया जा सकता!

●देशभक्तों की नई संस्कृति….

आजकल देश में ‘देशभक्ति’ और ‘स्वतंत्रता’ की नई संस्कृति पनप रही है । एक देशद्रोही, जिनपर अभी मुकद्दमा चल रहा है और ऐसे व्यक्ति को आमंत्रण देकर जिसतरह से दो गुटों में टकराव हुआ । इनसे कॉलेज की अपरिपक्व मानसिकता ही झलकती है । इस मैटर के बाद ‘सोशल मीडिया’ में कारगिल युद्ध के शहीद मनदीप सिंह की बेटी Miss गुरमेहर कौर ने एक मुहिम ही छेड़ दी कि ‘Pakistan did not kill my father, but war did kill.’  शहीद सैनिक की बेटी होने के कारण वे सम्मान के पात्र हैं, किंतु उन्हें इस तरह के डायलॉग कहने से बचने चाहिए।

●नष्ट होती जा रही कई भारतीय भाषाएं….

भारत की बहुसंख्यक आबादी हिंदी भाषा जानती है और हिंदी भाषा से ही संबंध रखती है । ‘भारतीय भाषा की अनदेखी का सिलसिला’ शीर्षक आलेख में श्री प्रेमपाल शर्मा ने यह बताया है कि अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय भाषा है, किंतु देश के अंदर जिस तरह से हिंदी का नुकसान हो रहा है । सिर्फ हिंदी ही क्यों, अन्य भारतीय भाषाओं के अभ्यर्थी जिस तरह से UPSC की परीक्षाओं में कम होते जा रहे हैं । इससे अपने देश में ही प्रचलित भाषाओं की मान्यता को समाप्त कही जा सकती है । संस्कृत तो कब की ही मर चुकी है ? अन्य दक्षिण भारतीय भाषाएं तो अपनी ही राष्ट्रभाषा ‘हिन्दी’ से लड़ रही है । किसी देश की श्रेष्ठ भाषा उनकी अपनी ही भाषा हो सकती है, जो बहुसंख्या में बोली जाती है । इसलिए हिंदी को दयनीय होने से बचाएं।

●उप चुनाव परिणाम से आत्ममंथन की दरकार….

लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों के परिणाम स्तब्ध करने वाले हैं । बिहार के लिए यह परिणाम कोई फर्क नहीं पैदा किया, क्योंकि अररिया संसदीय सीट मो. तस्लीमुद्दीन के निधन से खाली हुई थी । जिन पर उनके पुत्र सहानुभूति वोट पाकर जीते हैं । अन्य सीट भी वही जीते, जो राजनीतिक पार्टी वहाँ पहले से थे । किंतु UP का उपचुनाव परिणाम हैरान करने वाला है, वहाँ BJP की सरकार है, बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा त्यागी गई ‘गोरखपुर’ और उप मुख्यमंत्री के द्वारा त्यागी गई ‘फूलपुर’ संसदीय सीट  में BJP की हार चौंकाने वाली तो है, किंतु इस हार से UP की सरकार को  ‘आत्ममंथन’ करना जरूरी हो गया है।

●घर – घर शौचालय निर्माण की योजना सराहनीय….

जिनके घर शौचालय नहीं हैं, उन्हें भारत सरकार और बिहार सरकार ने Rs. 12,000 देने की घोषणा की। इस मायने में ODF  सार्थक और अच्छी पहल है । मेरे यहाँ 1955 ई0 से ही शौचालय है । मेरे गाँव के ऐसे घर, जिनके यहाँ पहले से शौचालय है, वे भी वार्ड सदस्य, आंगनबाड़ी केंद्र और पंचायत प्रतिनिधियों की मिलीभगत से यह साबित करते हैं कि उनके पास शौचालय नहीं है तथा कमीशन देकर Rs. 12,000 प्राप्त कर लेते हैं । हमें ऐसे ईमानदार श्रोतों से जाँच कराकर ही वैसे लोगों शौचालय बनाने के लिए Rs. 12,000 देने चाहिए, जो वास्तव में गरीब हो और जिनके घर पर शौचालय नहीं है।

●वर्ष और सप्ताह ‘विक्रम संवत’ की देन….

‘विक्रम संवत’ पंचांग समय – गणना की सुव्यस्थित प्रणाली का नाम है । इसके बनाने वाले चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य थे । बारह महीने का वर्ष, सात दिनों का सप्ताह का प्रचलन इसी पंचांग से हुआ था । हम जानते हैं, यह पंचांग 57 BC से आरंभ हुआ था । इसे हिंदी या भारतीय संवत भी कहा जाता है, जिनमें 12 महीनों के नाम हैं– चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आसाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन । ये सभी 12 महीने चंद्रमा की घूर्णन गति पर आधारित है।

●स्वच्छ मन में स्वच्छ तन संभव….

स्वच्छता हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है । घर सहित आस – पास और बाहर भी स्वच्छ रखना हम सबकी जिम्मेदारी है । सभी लोगों के सक्रिय सहयोग से ही स्वच्छता बनी रहेगी । स्वच्छता का अर्थ सिर्फ शरीर की ही सफाई से नहीं है । घर के अंदर, दरवाजे सहित सड़क, चौक, मोहल्ले, गाँव, शहर, धार्मिक स्थल, होटल, स्कूल, कॉलेज इत्यादि स्थानों की सफाई भी हमें नियमित करने चाहिए । महिला, पुरुष सहित बच्चों और किशोरों को भी इस अभियान में शामिल होने चाहिए । तभी विश्व के अन्य देशों की तरह हमारा देश भी अगली पंक्ति में आ पाएगी।

●पोती ने पूर्ण की दादा की इच्छा….

चीन की 25 वर्ष की Miss Fu Suvai ने 87 वर्ष के दादा जी की इच्छा पूर्ण करने के लिए ‘शादी’ की लिबास सिलवाई तथा इसे पहन दादाजी के हाथ थामे चर्च गयी । हालांकि Miss Suvai की शादी की इच्छा अब भी नहीं है । Miss Fu की माता – पिता वर्षों पहले तलाक ले चुके हैं और Miss Fu अपने दादा जी के साथ ही रह रही है । दादा जी की इच्छा ‘पोती’ को दुल्हन लिबास में देखने की थी, क्योंकि वे दुनिया से कब अचानक कूच कर जाय ? सामान्यतः, चीन में इसतरह करर रस्म ‘पिता’ निभाते हैं । सचमुच में यह कहानी प्रेरणादायी है।

●नौकरशाही की हकीकत….

‘नौकरशाही की जिम्मेदारी का दायरा’ शीर्षक आलेख में Dr. महेश भारद्वाज ने लिखा है कि देश में नौकरशाही की सोच वही होती है, जो सरकार सोचती है ।पदोन्नति, पदावनत, निलंबन, बर्खास्तगी आदि को लेकर नौकरशाह हमेशा से सरकार और सत्ता पक्ष के करीब रहना चाहता है । एक कहावत है– ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’ । सत्ता अगर ‘लाठी’ है, तो नौकरशाह उनकी ‘भैंस’ । ऐसे में गलत और झूठ को स्वीकारना नौकरशाह की मजबूरी हो जाती है, वे तब ‘धृतराष्ट्र’ हो जाते हैं और भले – बुरे का भेद नहीं कर पाते हैं । फिर तो ये अफसर व ‘सरकारी बाबू’ भ्रष्ट हो जाते हैं और ईमानदारी छोड़ भ्रष्टाचार को अपना लेते हैं । ऐसे में कैसे भ्रष्टाचार का अंत होगा?

●कवि केदारनाथ का निधन अपूरणीय क्षति है….

पत्रकार खुशवंत सिंह की पुण्यतिथि, उपन्यास ‘राग दरबारी’ की 50 वीं वर्षगाँठ और कई यादगार तथ्यों का स्मरण कर ही रहा था कि कवि केदारनाथ सिंह के निधन का दुःखद समाचारबप्राप्त हुई । वे प्रकृति को स्पर्श कर जीवन से जुड़ी संवेदनाओं के कवि थे । उनकी कविताएं कवि अज्ञेय के संपादन में प्रकाशित ‘तीसरा सप्तक’ में संकलित हुई थी…. मुझे उनसे प्रत्यक्ष में मिलने का अवसर प्राप्त हुआ था । उसे ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ प्राप्त हुआ था । प्रियजन के जाने से अत्यंत दुःख पहुंचता है।

●ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों की व्यवस्था में सुधार हो….

ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अच्छे दिनों की राह देखते – देखते उनकी आंखें पथरा चुकी हैं । कटिहार, समस्तीपुर जिला सहित बिहार के प्रायः जिलों के गांवों में जो बैंक है, वहां की व्यवस्था खराब और लचर है । कटिहार के CBI,  अमदाबाद और समस्तीपुर के SBI, मोरवा ताजपुर शाखा की स्थिति काफी दयनीय है । एक तो बैंक देर से खुलते हैं, फिर लिंक फैल होने की बात रोज होती है । Account update तो कभी नहीं होता है । बैंक के शाखा प्रबंधक से लेकर आदेशपाल तक आलसी हो गए हैं । जिनका कोई देखनहार नहीं हैं।

●संख्या सिद्धांत का अद्भुत जानकार देश है भारत….

सम्पूर्ण संसार के गणितज्ञ और गणित के सामान्य जानकार भी ‘Prime Numbers’ और इसे ज्ञात करने नाम से ही परेशान हो जाते हैं । भारत संख्या – सिद्धांत के मामले में अद्भुत जानकार देश है । महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन ने अपने 33 वर्ष की अल्प जीवन में ही संख्याओं पर अनेक प्रमेयों की खोज किये, जिनमें ‘Prime Numbers’ पर भी प्रमेय है । परंतु यह अधूरा है । भारत सरकार उनके जन्मदिवस पर ‘राष्ट्रीय गणित दिवस’ मनाया जाना घोषित कर चुके हैं । भारत के विश्वविद्यालयों में ‘Number Theory’ के जानकार प्रोफेसर नहीं हैं तथा वहाँ उच्च तकनीक वाले कंप्यूटर भी नहीं हैं । गणितज्ञ रामानुजन के समय कंप्यूटर नहीं था, बावजूद उनके द्वारा खोजे गए ‘प्रमेयों’ की व्याख्या तक आज के कंप्यूटर और गणितज्ञ नहीं पहुंच पाए हैं।

●बच्चों के Parents नहीं जानते हैं ‘सोशल मीडिया’ के बारे में….

अमेरिका के एक स्कूल के टीचर स्किपर कोट्स 9 वीं कक्षा के 85 विद्यार्थियों को पढ़ाती हैं । एक दिन उन 14 – 15 साल के बच्चों से उन्होंने कहा कि वे सभी यह लिखकर बताएं कि उनके माता – पिता ‘सोशल मीडिया’ कितनी जानकारी रखते हैं ? इन 85 विद्यार्थियों में 5 ने लिखा कि उनके पास ‘सोशल मीडिया’ का account नहीं है । शेष 80 छात्रों ने लिखा कि वे Android Phone के साथ क्या कर रहे होते हैं, उनके माता – पिता नहीं जानते हैं । Mrs Kotes ने कहा कि यही मौका है, इन विद्यार्थियों के parents को alert होने का । अगर इस पर नहीं सोचेंगे, तो आपके बच्चे हाथ से निकल जाएंगे।

●शिक्षा में सबकी जिम्मेदारी….

सफल और सुखमय जीवन के लिए अच्छे स्वास्थ्य के साथ -साथ अच्छी शिक्षा भी जरूरी है । शिक्षा में अच्छा स्तर पाने के लिए शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है । माता – पिता तो बच्चे को जन्म देते हैं, परंतु उनमें शिक्षा – ज्ञान और संस्कार ‘शिक्षक’ ही देते हैं । लेकिन दुःख के साथ यह स्वीकारना पड़ रहा है कि अब ‘शिक्षक’ का वह सम्मान नहीं रहा, जैसे पहले हुआ करता था । मेरी राय में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में दोष तथा सरकारी उदासीनता भी मुख्य कारण हैं । गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए छात्र, अभिभावक, शिक्षक, समाज और सरकार अपनी – अपनी जिम्मेदारी से भागे नहीं, तभी शैक्षिक स्तर सुधर सकता है।

●शहीदों का सदैव करें सम्मान….

30 जनवरी को महात्मा गाँधी और 23 मार्च को सरदार भगत सिंह को सिर्फ याद कर हम अपने को सीमित कर लेते हैं । देश को आजाद कराने और राष्ट्र निर्माण में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का अतुलनीय योगदान था । सरदार भगत सिंह ने भी देशभक्ति की मिसाल पेश की थी । अतः, ऐसे सभी अमर शहीदों के प्रति हमें सदैव कृतज्ञ रहने की जरूरत है । इससे वर्त्तमान पीढ़ी को भी उनके महत्व का पता चलेगा और उनसे प्रेरणा ग्रहण कर पाएंगे।

●सेना को दें छूट….

‘कश्मीर में साहसिक फैसले’ शीर्षक आलेख में Mr. R. P. Singh (Retired Brigadier) ने प्रतिदिन हो रहे कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और धर्म के आधार पर कश्मीरियों को बरगलाने के गलत इरादे को नेस्तनाबूद  करने को लेकर भारतीय सेनाओं को अधिक छूट देने की वकालत किया है । भारत अपनी अस्थिरता के लिए पाकिस्तान को हमेशा ही जिम्मेदार ठहराया है । भारतीय संविधान के अनुसार ‘जम्मू – कश्मीर’ भारत का एक राज्य है और राज्य की अखंडता और वहां के लोगों की रक्षा करना भारत सरकार का परम कर्त्तव्य ही नहीं, बल्कि उनका अधिकार भी है।

●गलत रिपोर्टिंग….

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 19 (1) में ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का उल्लेख है । जिनका सर्वाधिक उपयोग ‘सोशल मीडिया’ में देखने को मिलता है । प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी इस ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ को देखा जा सकता है । वर्त्तमान में भारत में ‘प्रेस’ को पूर्ण आज़ादी प्राप्त है । पाकिस्तान जैसे देशों में ‘प्रेस’ को आंशिक आज़ादी भी प्राप्त नहीं है । ऐसे में विश्वभर के ‘मीडिया’ के कामकाज की आज़ादी को लेकर ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ की रिपोर्ट में भारत को 180 देशों की सूची में 136 वां स्थान पर रखा गया है । यह रिपोर्ट गलत, भ्रामक, अतथ्यपूर्ण और अतार्किक है।

●राष्ट्रनिर्माता होते हैं शिक्षक….

प्रत्येक घर में बच्चों के पालनहार उनके माता – पिता होते हैं। वहीं विद्यालय में बच्चों के भविष्य के निर्माता ‘शिक्षक’ होते हैं । शिक्षक या अभिभावक हमेशा ही बच्चों के लिए उत्प्रेरक का कार्य करते हैं । बच्चे विद्यालय में मात्र 6 घंटे रहते हैं, परंतु वह घर पर 18 घंटे बिताते हैं । इसलिए अधिक समय तक अभिभावक के साथ रहने के कारण उन बच्चों में उत्तम संस्कसर भरने चाहिए । बच्चों के अनुशासनहीन होने में महत्वपूर्ण भूमिका व्यस्त रहने वाले अभिभावक निभाते हैं । वे बच्चों को महंगे स्कूलों में नामांकन करा कर अपने दायित्व से मुक्त हो जाते हैं । बच्चों को अभिभावक से स्नेह नहीं मिलने के कारण वह तनावग्रस्त हो जाते हैं । तब उनकी शिक्षकों के प्रति भी सेवा – भावना खत्म हो जाती है । जिससे बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा प्रभावित होती है । अभिभावकों को चाहिए, वे अपने बच्चों को प्रेम करते हुए उन्हें अच्छे शिक्षकों के सान्निध्य में रखें।

●शौचालय वाले न लें सहयोग राशि….

सरकार ने घर – घर शौचालय अभियान के तहत जिनके घर शौचालय नहीं हैं, उन्हें इसके निर्माण के लिए एकमुश्त सहयोग राशि देने की घोषणा की है । आंगनबाड़ी सेविकाओं को हर घर में शौचालय होने या न होने की जाँच का जिम्मा सौंपा गया है । वे दल बनाकर इसकी जांच कर रही है । नागरिकों को चाहिए कि जिनके पास शौचालय नहीं है, वे ही सहयोग राशि लें । जिनके पास पहले से ही शौचालय है, वे यह राशि लेने की चेष्टा नहीं करें । उस राशि से किसी गरीब व्यक्ति के घर शौचालय बन जाएगा।

●बेहतर तालमेल की जरूरत….

पूर्व डीजीपी श्री प्रकाश सिंह ने अपने आलेख ‘नक्सलियों से पुलिस क्यों नहीं लड़ती ?’ में लिखा है कि प्रत्येक राज्यों में पुलिस सेवा में इस क्षेत्र के अनुभवी लोगों को लगाए जाए । जंगल पहचानने वाले लोग, नक्सलियों के सभी हरकतों से वाकिफ लोग, देशभक्ति में निहित लोगों की पुलिस टीम बनी चाहिए  तथा पुलिस बनने संबंधी कुछ नियमों की शिथिलता आवश्यक है । भीतरघातों, उग्रवादों, आतंकियों से लड़ने के लिए अत्याधुनिक हथियार और वायरसेट मोबाइल अत्यावश्यक हैं । अनुशासन, व्यायाम और योगा से पुलिस को चुस्त – दुरुस्त किया जाय । …. केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल भी आवश्यक है । राज्य पुलिस, अर्द्धसैनिक बलों और केंद्रीय पुलिस बलों में भाषाई और वर्चस्व संबंधी समस्याएं नहीं होने चाहिए।

●ट्रेनों में शौचालय की संख्या बढ़ाई जाए….

एक ओर भारत सरकार घर – घर शौचालय बनवाने के मुहिम या अभियान में जुटी है, तो दूसरी ओर ट्रेनों में शौचालयों के लिए यात्रियों को पंक्ति लगानी पड़ती है । भारतीय ट्रेनों में शौचालयों की संख्या बहुत कम है । सामान्यतः, जनरल, स्लीपर, चेयर एयर कंडीशनर बोगियों में 72 यात्रियों की बैठने की व्यवस्था रहती है । दोनों दिशाओं की ओर मिलाकर 4 शौचालय होते हैं । इसप्रकार से 18 यात्रियों में एक शौचालय है, जो घर – परिवार के 6 सदस्यों के लिहाज से भी बहुत कम है । वहीं एक जनरल बोगी में 5 गुने रेल यात्री सवार होते हैं । इस बीच यात्रियों को शौचालय जाने में बहुत परेशानी होती है । खासकर महिलाओं, बच्चें और बूढ़े लोगों को बहुत परेशानी होती है । शौचालय में न पानी होते हैं, न साबुन । यात्रियों को शौचालय गंदे नहीं करने चाहिए । ट्रेन में भारी भीड़ होने पर शौचालयों में भी लोगों द्वारा सफर की जाती है । गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रेल मंत्रालय को ध्यान देना चाहिए।

●बंद हो बुजुर्गों की प्रताड़ना….

आज के पुत्र और पुत्रवधू बूढ़े माता – पिता को रोजाना सताते हैं । वे उन्हें घर पर नहीं रखते हैं, वृद्धाश्रम में रखते हैं । अगर घर में रखते हैं, तो घर के बाहरी हिस्से में । बुजुर्ग माता – पिता को समय पर खाने को नहीं मिलता है । अगर खाना मिल भी जाय, तो दवा समय पर नहीं मिलती । दवा की व्यवस्था हो भी जाय, परंतु तब उन्हें सेवा और प्रेम प्राप्त नहीं हो पाता है । इस हेतु सरकार के साथ – साथ समाज को केंद्र में आना चाहिए । मुख्यतः, यह एक सामाजिक पहल है।

●बाजार में अतिक्रमण….

बिहार के कटिहार जिला में फलका बाज़ार में अतिक्रमण के कारण सड़कें संकरी हो गई है । जिससे आने – जाने में दिक्कत महसूस होता है । कुछ समय पहले ही विभाग द्वारा अतिक्रमणकारियों से मुक्ति पाने के लिए लाउडस्पीकर से प्रचार – प्रसार किया गया था । फुटपाथ पर अवस्थित दुकानों को हटाने का प्रयास किया गया था । लेकिन कुछ दिनों तक ही शांति रह पाई । व्यवस्था अब पूर्ववत हो गया है । उन अतिक्रमणकारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है । प्रशासन की खामोशी उन्हें पक्षपात बनाता है।

डिजिटल युग के भ्रष्ट वायरस….

आजकल ‘फिरौती’ वायरस का उत्पात पूरी दुनिया में डर पैदा किया हुआ है । इसके तहत कुछ हैकर ‘Rainsumware software’ and ‘Vannacry virus’ का इस्तेमाल कर पहले तो ‘कंप्यूटर सिस्टम’ में email के माध्यम से लिंक भेजते हैं और यदि लिंक पर click किया जाय, तो पूरा सिस्टम ही हैकर द्वारा हैक हो जाता है ।  …. फिर अगर इस एवज में ‘फिरौती’ मिल गई, तो प्रभावित व्यक्ति के सिस्टम को आज़ाद कर दिया जाता है ।  अगर ‘फिरौती’ नहीं मिली, तो कम्प्यूटर के डाटा को उड़ा दिया जाता है । सर्वप्रथम हॉस्पिटल के ‘डाटा’ गायब किये जाने लगे हैं ।  जो कम्पनी या हैकर ऐसे वायरस बनाती है, वह ‘एन्टी – वायरस’ भी बनाता है । इस डिजिटल युग में हमें इन वायरसों से लड़ने के लिए हमेशा ही तैयार होना होगा।

●आस्था की अनदेखी….

‘अयोध्या मसले का हल’ में Mr. संजय गुप्त ने न्यायालयी प्रक्रिया में उलझे ‘श्रीराम मंदिर निर्माण’ के विवाद को एक निश्चित समय में सुलझाने की जो तार्किक बात की है, उस पर शीर्ष न्यायपालिका को गौर करना चाहिए । अभी हाल में CBI की याचिका पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ‘विवादित ढाँचा’ गिराने को एक आपराधिक साजिश माना है तथा संबंधित लोगों पर मुकद्दमा चला कर 2 वर्ष के अंदर इस केस को निपटाने को कहा है । …. यह प्रमाणित होने के बाद कि अयोध्या में जो ‘विवादित ढाँचा’ गिराया गया, यह ‘ढाँचा’ भी मंदिर तोड़ कर बनाया गया था । श्रीराम की जन्मभूमि ‘अयोध्या’ में प्रभावित धर्म के लिहाज से भी ‘श्रीराम मंदिर’ बनना चाहिए।

●सड़क पर गड्ढों की भरमार….

कुछ साल पहले बिहार के ‘Manihari – Katihar Road’ का जीर्णोद्धार किया गया था, लेकिन अब उस road पर गड्ढों की भरमार हो गई है । वर्ष 2013 से यह road खराब हों शुरू हुई है और अब भी निरंतर जारी है । Road के खराब होने का कारण भारी वाहन के परिचालन से road का टूटना है । अगर समय – समय पर road के मरम्मत कार्य भी जारी रहे, तो कोई भी road कभी खराब नहीं होंगे । इस road की बदतर स्थिति होने के कारण हर दिन Tempo पलटने की दुर्घटना होते रहती है । अतः, प्रशासन और परिवहन विभाग को सड़क मरम्मत के लिए शीघ्र व्यवस्था करनी चाहिए।

●पिछड़ों की अनदेखी….

अपने आलेख ‘पुराने ढर्रे की राजनीति का अंत’ में Mr. बलबीर पुंज ने कहा है कि अब ‘सबका साथ, सबका विकास’ से ही देश और राजनीति में सुधार आ सकता है । विपक्ष की राजनीति पुराने ढर्रे की है, जो ‘जातिवाद’ पर आधारित है । यह ठीक है, किंतु लेखक की मंशा ‘ब्राह्मणवाद’ तो नहीं ! क्योंकि अगड़ी जातियों के लोग मुख्य धारा से जुड़े रहने के लिए ऐसी तिकड़मी चाल चलते रहते हैं । हमें ‘पूंजीवाद’ में भी पिछड़ें, दलित, शोषित, वंचितों की भलाई देखने चाहिए, तभी हम ‘अंधायुग’ से बाहर आ सकते हैं।

●जर्जर पुल से परेशानी….

बिहार के पूर्णिया जिला का ‘रायपुरा पुल’ जर्जर हो गया है । यह औद्योगिक शहर ‘भागलपुर’ जाने का भी सहज मार्ग है । इस पुल पर लगातार आवागमन जारी रहने के कारण यहाँ दुर्घटना की हमेशा आशंका बनी रहती है । इतना ही नहीं, प्रसिद्ध राजनीतिक शहर ‘मधेपुरा’ को जोड़ने वाली यह पुल ऐतिहासिक रूप से भी काफी पुराना है । इसके जीर्णोद्धार की अति आवश्यक है।

●’बिहार दिवस’ 22 मार्च को ही क्यों….

वर्ष 2010 से पहले बिहार राज्य अपना स्थापना दिवस 1 अप्रैल को मनाता था । ज्ञात हो, वर्ष 1912 में 22 मार्च को बंगाल से बिहार को अलग स्वतंत्र प्रान्त बनाए जाने की अनाधिकार घोषणा भर हुई थी । जबकि वर्ष 1912 में 1 अप्रैल को ‘बिहार’ को एक स्टेट सिंबल के रूप में अपना स्टाम्प (मुहर) मिला था । उसकी राजधानी स्थानांतरित होकर Calcutta (Kolkata) से पटना आ गई थी । ऐसे में 22 मार्च की तिथि ‘बिहार दिवस’ के लिए उपयुक्त नहीं है।

●विकास ही बनेगा ‘BJP’ का ढाल….

UP राज्य उपचुनाव में राजनीतिक पार्टी ‘SP – BSP’ के बीच की दोस्ती एक ओर तो बेमेल है, वहीं दूसरी ओर आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में केंद्रीय सत्ता की राजनीतिक पार्टी ‘BJP’ के लिए ‘खतरे की घंटी’ है । भारतीय जनता ने वर्ष 2014 में केंद्रीय सत्ता के लिए तथा 2017 में UP की सत्ता में BJP को सौंपी थी । उपचुनाव में हार के बावजूद BJP ‘विकास की राजनीति’ कर ही ‘विपक्षी एकता’ का सामना कर सकती है।

●तूफान से करें ‘आम के टिकोलों’ की रक्षा….

बिहार के पूर्वांचल क्षेत्र में इस बार आम और लीची में अप्रत्याशित ‘बौर’ आये हैं । पेड़ों पर छोटे – छोटे ‘टिकोले’ भी निकल आये हैं । यह सामान्य अवधारणा है कि जिस वर्ष आम में अधिक ‘बौर’ आते हैं, उस वर्ष आँधी और तूफान ज्यादा ही आते हैं । उससे आम के ‘टिकोलों’ को काफी नुकसान पहुंचता है । इसे देखकर बगीचा वालों को चाहिए कि वे कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर आम के पेड़ों पर कीटनाशक दवाई तथा स्प्रे का नियमित छिड़काव करने चाहिए।

मुजफ्फरपुर में 6 फ़ीट नीचे गिरा जल स्तर….

गर्मी की धमक के साथ मुजफ्फरपुर शहर के भूगर्भ का जल स्तर 5 से 6 फ़ीट नीचे गिर गया है । शहरी क्षेत्र में सामान्य जल स्तर 25 फ़ीट तक रहता है । लेकिन 15 दिनों के अंदर ही यह जल स्तर 5 से 6 फ़ीट नीचे चला गया है । इससे शहर में जितने चापाकल और सामान्य पम्पिंग सेट लगे हैं, उनमें पानी सूखती जा रही है । सबसे ज्यादा परेशानी बूढ़ी गंडक नदी के समीपवर्ती शहरी क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र (चंदवारा, Lakaridahi, जूरन छपरा, अखाड़ा घाट इत्यादि) में जल स्तर नीचे चला गया है । शहरी क्षेत्र में कुल 324 चापाकल लगे हैं, जिनमें करीब 150 चापाकल खराब पड़े हैं।

●सीतामढ़ी में जल संकट को लेकर चिंता का माहौल….

मार्च माह में ही मई और जून माह जैसी गर्मी लग रही है । सीतामढ़ी में जल – संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है । विशेषतया, जिला के सोनबरसा प्रखंड की इंदरवा पंचायत, बोनखड़ा प्रखंड की बनाउल, परिहार की नरंगा, नानपुर के कई गांव जल -संकट के चपेट में आ गए हैं । … पिछले साल इस समय ही इन स्थानों के चापाकल सूख गए थे । पीने का पानी के लिए ग्रामीणों को लंबी दूरी तय कर दूसरे गांव जाना पड़ता था । विभागीय जानकारी के अनुसार, अभी भूमिगत जल – स्तर 15 फ़ीट नीचे है।
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डॉ. सदानंद पॉल

एम.ए. (त्रय), नेट उत्तीर्ण (यूजीसी), जे.आर.एफ. (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), विद्यावाचस्पति (विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर), अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी के प्रशंसित पत्र प्राप्तकर्त्ता. गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स इत्यादि में वर्ल्ड/नेशनल 300+ रिकॉर्ड्स दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 12,000+ रचनाएँ और संपादक के नाम पत्र प्रकाशित. गणित पहेली- सदानंदकु सुडोकु, अटकू, KP10, अभाज्य संख्याओं के सटीक सूत्र इत्यादि के अन्वेषक, भारत के सबसे युवा समाचार पत्र संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में अर्हताधारक, पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.