बोधकथा

पति पर्व !

कोई भी आस्था स्वार्थी नहीं हो सकता ! हम देश की संस्कृति की बात करते हैं, किन्तु भारतीय संविधान अंतर्गत ‘कर्त्तव्य’ में नव सृजन, अन्वेषण व वैज्ञानिक प्रगति की बात लिखा है, नील आर्मस्ट्रॉन्ग व चंद्रयान-2 के बाद तो ‘चाँद’ को निहार कर किस ‘विज्ञान’ का उन्नयन कर रहे हैं, जब हम जान रहे हैं कि चाँद सिर्फ एक पिंड है, जहाँ गड्ढ़े, खाई, पहाड़ इत्यादि हैं । जब हम अपने किताबों में इन चीजों का अध्ययन कर रहे हैं, तो फिर ‘आस्था’ को कहाँ ठहराएं ? कुछ चीजों के कारण हमारी सोचने की शक्ति खत्म न हो जाय ! धर्म का अर्थ जो हम कर रहे हैं, वो नहीं है। हम ऐसे पत्नियों के परिवार को जान रहे हैं, जो सालो भर सास-ससुर की गालियाँ देती रहती हैं, कम कमानेवाले पति को तो ‘कोढ़ी’ होने का अभिशाप देती रहती हैं और एक दिन पति के लिए कथित ‘पति पर्व’ करती है; तो सास, ससुर को उस दिन ही सिर्फ पैर पूजती है, अन्यथा दिन यही लिए रट लगाती है कि बुढ़वा और बुढ़िया मरते क्यों नहीं हैं? धर्मावलम्बी होने का मतलब यह नहीं है कि हम दकियानूसी व अंधविश्वास को भी अमल में लाते रहूँ ! हम भ्रष्टाचार में डूब कर धर्मावलम्बी नहीं हो सकते ! मैंने अपने कई सगे-संबंधियों को देखा है, वो कर्ज लेकर ‘पर्व-त्योहार’ मनाते हैं, किन्तु सालोभर बाद भी कर्ज वापस नहीं कर पाते हैं !

डॉ. सदानंद पॉल

एम.ए. (त्रय), नेट उत्तीर्ण (यूजीसी), जे.आर.एफ. (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), विद्यावाचस्पति (विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर), अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी के प्रशंसित पत्र प्राप्तकर्त्ता. गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स इत्यादि में वर्ल्ड/नेशनल 300+ रिकॉर्ड्स दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 12,000+ रचनाएँ और संपादक के नाम पत्र प्रकाशित. गणित पहेली- सदानंदकु सुडोकु, अटकू, KP10, अभाज्य संख्याओं के सटीक सूत्र इत्यादि के अन्वेषक, भारत के सबसे युवा समाचार पत्र संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में अर्हताधारक, पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.