लघुकथा

फिर मिलते हैं

कई वर्षों के बाद वह ऑफिस के काम से आगरा आया हुआ था । काम तो एक दिन पहले ही निपट गया, पर वह अपने कॉलेज वाले दोस्तों से एक मुलाकात करना चाह रहा था । वैसे फेसबुक पर दोस्तों के क्रियाकलाप देखता रहता था और कभी-कभी ऑनलाइन मिलने पर उनसे मैसेंजर में चैट भी करता । लेकिन आभासी और वास्तविक दुनिया में बहुत अंतर है । सोचा, आज फेस टू फेस बैठकर पुरानी यादें ताजा करेंगे ।
दोस्तों से मिलने की चाहत में आठ-दस दोस्तों को फोन मिला चुका था, पर सभी व्यस्त थे । कोई शादी में, कोई काम में, कोई बाहर था । ‘फिर मिलते हैं’ के आश्वासनों को साथ लेकर वह वापस अपने वर्तमान शहर की ओर लौट चला…।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111