लेख

*महिलाएंँ तथा लड़कियांँ अपने साथ होने वाले अत्याचार और शोषण और दुर्व्यवहारर को क्यों छुपाती है।*

महिलाएँ एवं लड़की घर से बाहर रहते समय अपने साथ होने वाले अत्याचार शोषण और दुर्व्यवहार को क्यों छुपाती है इसके लिए निम्नांकित बिंदु है

1.अपनों का डर ÷

आज भी पुरुष प्रधान देश में महिला या लड़की का कंधे से कंधा मिलाना मतलब कहीं ना कहीं अपनों के खिलाफ जाकर खुद को साबित करने का प्रमाण है क्योंकि आज भी महिलाओं और लड़कियों को अपने ही परिवार जनों द्वारा वह विश्वास प्राप्त नहीं होता जो कि एक लड़के को मिलता है जो आजादी उसे घर के बाहर पढ़ने ,लिखने या जॉब करने के लिए मिलती है यदि ऐसे में वह अपने ऊपर अत्याचार, शोषण या दुर्व्यवहार को बताती है तो कहीं ना कहीं उसे बिना गलती के ही घर में बैठने की सजा दे दी जाती है

2. समाज का डर-

यदि लड़की या महिला के परिवार जन उस पर अपना भरोसा दिखाते भी हैं तो किसी भी प्रकार की अनहोनी होने शोषण होने या दुर्व्यवहार होने पर वह समाज के द्वारा सहयोग से वंचित हो जाते हैं और अपनी ही बदनामी के कारण अपने साथ हुए शोषण को छुपाने उचित समझते हैं

3. मानसिक व शारीरिक रूप से खुद को कमजोर समझना महिलाएं भावात्मक रूप से सभी के साथ अपनेपन का व्यवहार की अपेक्षा रखती है किंतु जब उसके साथ शोषण किया दुर्व्यवहार होता है तो वह अपने आप को ही कमजोर समझने लगती है ऐसे में वहां जागरूक होना होगा अपनी ही गलती मान कर चुपचाप इन गलतियों को सहन करने की गलती कर लेती हो

किंतु ऐसा नहीं होना चाहिए महिलाओं को खुद में इतना जागरूक होना चाहिए कि यदि कोई आपके साथ ऐसा करता है तो उसके खिलाफ क्या एक्शन लेना है क्या प्रतिक्रिया करनी है और किस के दौरान उसे सजा दिला जाएगी यह सारी जिम्मेदारी महिलाओं को स्वयं लेनी चाहिए

4. कानून व्यवस्था का लचीला होना-

जब महिलाओं के साथ शोषण होता है और महिला इसके खिलाफ आवाज उठाती है तो शुरुआती प्रक्रिया के दौरान ही महिलाएं या लड़कियों के साथ ऐसे ऐसे प्रश्न पूछे जाते हैं जिनका सामना उनके शोषण होने के बाद भी अनेक बार शोषण होने के समान है ऐसे में महिलाएं खुद में शर्मसार होकर इस को छुपाने का कार्य कर लेती है

5. सम्मान नहीं समानता का अधिकार –

भारत जैसे विकासशील देश में जहां महिलाओं को देवी स्वरूप माना जाता है वहीं महिलाओं के साथ होने वाले शोषण भी कम नहीं है लेकिन फिर भी हमारे पढ़े लिखे समाज ने उन्हें सम्मान देने के लिए मेट्रो ट्रेन में सेपरेट बोगी बना दी है हमारे सज्जन व्यक्ति आज भी महिलाओं को सम्मान देने के लिए लेडीस फर्स्ट जैसी बातें करते हैं और यह सम्मान देते भी हैं किंतु क्या यह वास्तविक रूप से होता है क्या वाकई में आज पुरुष प्रधान देश की मानसिकता बदल गई है नहीं यदि ऐसा हुआ होता तो महिलाओं को सम्मान की नहीं समानता की जरूरत है आज मैं समाज से पूछती हूंँ क्या वाकई में यह देश में समानता का अधिकार देता है।

 

डॉ.सारिका ठाकुर “जागृति”

लेखिका,कवयित्री,समाज,सेविका,आलोचक

ग्वालियर_मध्यप्रदेश

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डॉ. सारिका ठाकुर "जागृति"

ग्वालियर (म.प्र)