कविता

रेप

क्या बात करें रेप की बड़ी बुरी खबर है,
 एक खबर से नजर हटती नहीं
कि दूजी तैयार है,
कमजोर नहीं है नारी बस
हैवानियत की होती शिकार है,
 कमजोर तो वह मर्द है
जो मर्दानगी जताने के लिए
नारियों पर करता अत्याचार है ।
एक अखबार से खबर कीस्याही मिटी नहीं कि
दूसरी नई खबर सुनने में आ जाती है,
गलती उन माता-पिता की भी है जिन्होंने बेटियों को सम्मान के लिए लड़ना सिखाया ही नहीं ।
गलती उस भाई की भी है
जिसने अपनी बहन की इज्जत
और दूसरों को कुछ माना ही नहीं ।
संस्कार और समाज के डर से अक्सर चुप रह जाती हैं लड़कियां…..
कभी गलत के सामने आवाज नहीं उठाती है लड़कियां ।
सह लेती है चुपचाप वह हैवानियत शायद,
 इसलिए उन हैवानो को मिलती शय है,
 बड़े अचंभे में पड़ जाते हैं जब देखते हैं यह खबरें ,
जहां नारी को दिया देवी का दर्जा,
वहीं पर होता यह घिनौना अपराध है,
ऐसे समाज पर तो हमें,
बहुत-बहुत धिक्कार है ।
हैवानो को खुला छोड़ कर घर की बेटियों को रखते हैं दबाकर,
 बड़ा बेरहम किस्सा होता है जिसे भुलाना बड़ा मुश्किल होता है ।
क्यों उन हैवानो के हाथ नहीं कांपते ऐसी हैवानियत के वक्त,
क्यों भूल जाते हैं उनकी रगों में बहने वाला वह स्त्री का ही है रक्त ।
क्यों कदर नहीं करते वह किसी की बहनों की ,
क्या फर्क पड़ता है बहन अपनी हो या परायो की,
क्यों दर्द देता है उसे जीते जी मरने का?
क्या बिगाड़ा होगा किसी ने इस हैवान का?
 बातें करते हैं उन्चे घर-घराने और समाज की,
धूल है ऐसे समाज पर और उनके झूठी बातों ओर दिलासो  पर,
इतना गलत करने पर भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता,
क्या इतना कमजोर और बेबस है उस लड़की का दर्द,
क्या कोई मान नही उसके आत्म सम्मान का ?
जिंदगी खराब करने के बाद भी वह खुलेआम घूम रहे हैं,
और हम बैठे नारी के सम्मान पर भाषण सुन रहे हैं ।
 चर्चा का विषय बना कर बस बातों को फैला कर मजा लिया जाता है,
उस लड़की की तकलीफ और दर्द से किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता है ।
सबसे बड़ा अनुरोध है उन माता-पिता से,
 चाहे घर चलाना सिखाओ या ना सिखाओ बेटीयो को
पर अपने आत्मसम्मान की रक्षा करना जरूर सिखाना चाहिए ।
 किसी और के लिए ना सही पर अपने आत्मसम्मान के लिए लड़ सके इस काबिल तो बनाना चाहिए ।
इज्जत करो बहनों की
क्या फर्क पड़ता है अपनी हो या गैरों की।
— शिवानी एम आर जोशी