कविता

बचपन की मीठी यादें

ओ बचपन की प्यारी मीठी यादें
ओ लड़ना-झगड़ना और फरियादें
ओ मान-मनव्वल और झूठी वादे
मुझे आज भी याद है,,,,

ओ बचपन के निश्छल भोले मन
ओ रहते हर पल पुलकित मगन
ओ किलकारी भरते सदा तनमन
मुझे आज भी याद है,,,,

ओ ईर्ष्या द्वेष से परे मीठी बातें
ओ रह-रह के करते मुलाकातें
ओ मिलके हंसते और मुस्कुराते
मुझे आज भी याद है,,,,

ओ निष्कपट मन मिट्टी की मूरत
ओ भोला-भाला सलौना सा सूरत
ओ रहते दिन-भर पलपल फुर्सत
मुझे आज भी याद है,,,,

ओ शरारत करते सुहाने पल
ओ पगडंडी में चलते निश्छल
ओ इतराते इठलाते बीते कल
मुझे आज भी याद है,,,,

ओ गांवों की संकरी गलियाँ
ओ खेलते कंचे और गिल्लियाँ
ओ आनन्द की किलकारियाँ
मुझे आज भी याद है,,,,

— अशोक पटेल”आशु”

*अशोक पटेल 'आशु'

व्याख्याता-हिंदी मेघा धमतरी (छ ग) M-9827874578

One thought on “बचपन की मीठी यादें

  • अशोक पटेल"आशु"

    सम्मानीय सम्पादक महोदय जी सादर नमस्कार।
    आपको हृदय से धन्यवाद, साधुवाद,आभार।
    ओपन हो गया।बहुत सुंदर साइट बनाया गया है।
    बहुत अच्छा लगा।

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