कविता

शहीद की व्यथा

सपनें सब परिवार के छोड़,
देश पर शहीद हुवा जवान।
माँ मॉन के भारत भूमी को,
कर दिया उसने सब कुर्बान।।

माता की हो गई कोख सुनी,
राखी का भी नही रहा मॉन।
भाई भाई के प्यार को तरसे,
खाली रह गया सिंदूर दान।।

बाप के आँसू अब सुख गये,
पत्थर दिल बन गया बेजान।
गुड़िया रोते रोते हुए बोली,
पापा मिलने गए है भगवान।।

गाँव घर आंगन सुना हो गया,
बेटा जब छोड़ चले जहान।
करके सब अब याद उसे फिर,
कहते बेटा था ये बड़ा महान।।

लिपट के आया जब घर में,
तिरंगा बढ़ा रहा था जब शान।
सबने खुद से खुद को बोला,
बेटा हो गया माँ के लिए कुर्बान।।

— सोमेश देवांगन

सोमेश देवांगन

गोपीबन्द पारा पंडरिया जिला-कबीरधाम (छ.ग.) मो.न.-8962593570