गीत/नवगीत

गीत

जब कभी भर आएं आंखें,जब कभी बोझिल हो मन
प्रेम से अपने हृदय से याद कर लेना मुझे

जिंदगी गर धूप है,तो छांव भी मिल जाएगी
राह में गर न मिले कोई,तब याद मेरी आएगी
जब कोई बीता हुआ पल,तुमको रुलाए कभी
प्रेम से अपने हृदय से याद कर लेना मुझे

रात जब सूनी कोई ,तुमको जो तड़फाए तो
ऐसे में जब कभी ,कोई याद तुमको आए तो
है बहुत गमगीन जीवन,पर न घबराना कभी
प्रेम से अपने हृदय से याद कर लेना मुझे

तुमको नहीं होगा पता , कि मेरी क्या मजबूरियां
पर कभी दिल से तुम्हारे ,होंगी नहीं कोई दूरियां
जब कभी सपने में तुम, नींद में डर जाओ तो
प्रेम से अपने हृदय से याद कर लेना मुझे

दुख दर्द सारे जिंदगी के,बांट लूंगा मैं तुम्हारे
प्रेम के दो शब्द दिल से,जो सुनोगे तुम हमारे
जब किसी को सोचकर तुम,मुस्कुराओगे कभी
प्रेम से अपने हृदय से याद कर लेना मुझे

— प्रमोद कुमार स्वामी

प्रमोद कुमार स्वामी

करेली (म.प्र.)