कविता

हम भी राजकुमार

बड़े गुमान में मत रहिए
हम भी कम नहीं हैं,
आपको क्या लगता है
हम किसी राजकुमार से कम हैं?
हमें देखो हम तो सचमुच के राजकुमार हैं
ठसक से देखो और महसूस करो
फिर विचार करो क्या राजकुमार के
होते दो चार सिर हाथ पैर हैं।
सलाह मानों तुम भी राजकुमार बन जाओ
दिल की बात मानो और
अपने राजकुमार होने का जलवा
बस! मेरी तरह दिखलाओ।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921