कविता

भारत की धरती

भारत ऋषियों मुनियों की धरती है
जहाँ सावन की मेघा रोज बरसती है
नदियाँ पर्वत की गोद से उतरती है
मनिषियों की जहाँ पे कई बस्ती है

भारत ज्ञानियों की पावन धरती है
वन उपवन में जहाँ छाई मस्ती है
मौसम यहाँ दिलवाला मिलता है
हिमालय उत्तर में रखवाला होता है

भारत विज्ञान की अनुपम धरती है
हर युग में अविष्कार जहाँ होती है
ज्योतिषियों की अनूठा गिनती है
अविष्कार की बसती जननी है

भारत में रामायण घर घर बिराजती है
प्रभु श्रीराम की कथा को  सुनाती  है
श्रीकृष्णा की छवि यहाँ मिलती    है
हर घर से राधिका जहाँ निकलती  है

भारत शूरवीरों की विस्तृत धरती है
महराणा प्रताप की जैसी हस्ती है
वीर शिवाजी की वशंज हम कहलाते हैं
दुश्मन को मार खदेड़ भगाते   हैं

भारत वीरांगनाओं की धरती है
घर घर से लक्ष्मीवाई मिलती है
विवेकानन्द युवा का आर्दश है यहाँ
पत्थर भी पूजे जाते है       जहाँ

भारत कुरवानी की धरती है
मुनि दधिचि की अस्थि मिलती है
दाता दानवीर जहाँ पे विराजते हैं
सत्यवादी हरिश्चन्द्र जहाँ बिकते हैं

— उदय किशोर साह

उदय किशोर साह

पत्रकार, दैनिक भास्कर जयपुर बाँका मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार मो.-9546115088