सामाजिक

अपने ही घर में असुरक्षित बेटियाँ

आज सुबह से अनराधार बारिश हो रही थी, शाम के सात बज गए तो आँचल को लगा आज तो मिनी घर में ही होगी इतनी बारिश में थोड़ी बाहर जाएगी। आँचल ने पूरा घर छान लिया पर मिनी कहीं नहीं दिखी। आँचल को लगा मिनी को बारिश बेहद पसंद है तो शायद बारिश का मज़ा लेते नहा रही होगी बाहर कहीं इसलिए रोज़ की तरह आज भी आँचल मिनी को ढूँढती गार्डन में आई। पर ये क्या आँचल ने देखा तो बारिश का मज़ा लेने की बजाय मिनी एक बेंच पर भीगती-ठिठुरती, उदास-चुपचाप बैठी थी।
आँचल ने नोटिस किया देवर वेदांत के घर आने का समय होते ही मिनी रोज़  गार्डन में खेलने चली जाती है, और कुछ दिनों से चुप-चुप सी उदास भी रहती है। रोज़ तो आँचल बहला फुसलाकर घर ले आती थी, पर आज मैं घर में नहीं आऊँगी मतलब नहीं आऊँगी की रट लगाए रुआँसी हो उठी। आँचल मिनी को समझाकर चाॅकलेट की लालच देकर अपने घर के बदले अपनी दोस्त अनिता के घर ले गई, जो चाइल्ड सायकोलाॅजी में मास्टर थी, आँचल ने अनिता को सारी बातें बताई।
अनिता सब समझ गई, अनिता ने आइसक्रीम और खिलौने देकर मिनी को बातों में उलझा कर आहिस्ता-आहिस्ता  सारी बातें उगलवाई, तो मिनी ने हाथ में रहे एक फूल को आक्रोश के साथ मसल कर जो बताया उसे सुनकर दोनों अचंभित हो गई। मिनी ने कहा आंटी वेदांत चाचू जब मुझे प्यार करने बाँहों में भरते है तो मुझे अजीब लगता है। वो प्यार नहीं करते ऐसी-वैसी जगह को दबाकर मेरे होठों पर पप्पी लेते है और अपनी फ्राक उपर करते सीने पर नाखून के निशान दिखाते बोली ये देखिये कल कितना ज़ोरों से मेरे सीने को दबाकर प्यार किया बहुत दुखता है, मुझे वेदांत चाचू बिलकुल पसंद नहीं।
अनिता ने कहा आँचल मिनी अपने ही घर में बैड टच का शिकार है, तुम्हारा देवर मिनी का शारीरिक शोषण कर रहा है। इससे पहले की मिनी के साथ कुछ गलत हो जितना जल्दी हो सकें अलग घर लेकर ऐसी मानसिकता वालों से दूर हो जाओ। बेटियाँ अब अपने ही घर में सुरक्षित नहीं अपनों के ही हाथों रोंदी जाती है मिनी डर गई है, इससे पहले की ये डर उसके नाजुक मन को तोड़ दे कोई निर्णय लेकर समाधान ढूँढो।
आँचल ने आगबबूला होते उसी वक्त अपने पति संजय को घर ढूँढने के लिए बोलकर संयुक्त परिवार से अलग रहने का निर्णय लिया। संजय ने आँचल से नाराज़ होते कहा मैं तुम्हें ओरों से अलग समझता था पर तुम भी वैसी ही निकली अलग आशियां बसा कर जिम्मेदारियों से भागने वाली स्वार्थों बहू। आँचल ने इतना ही बोला संजय आप मुझे गलत समझ रहे है आप भी जानते है मैंने अपनी जिम्मेदारियों से कभी मुँह नहीं मोड़ बस इतना समझ लो अब संयुक्त परिवार के मायने बदल गए है, संजय हमारी बेटी इस घर में सुरक्षित नहीं। संजय थोड़े में बहुत कुछ समझ गया और बोला ओह हम कल ही अलग घर लेकर चले जाएंगे। संयुक्त परिवार टूटने का कलियुग का एक घिनौना कारण यह भी होगा कभी सोचा नहीं था। मिनी ज़्यादा कुछ नहीं समझी फिर भी आँचल के फैसले पर मुस्कुराते अपनी माँ के गले लग गई।
— भावना ठाकर ‘भावु’

*भावना ठाकर

बेंगलोर