सामाजिक

अंतिम संस्कार या अंत्येष्टि क्रिया

वैश्विक स्तरपर चर्चित सम्माननीय दो शख्सियतों का पिछले दिनों निधन हुआ जिसने दुनिया का ध्यान खींचा और तमाम देशोंके राष्ट्राध्यक्ष नेता प्रधानमंत्री मंत्री प्रतिनिधि सहित उनके सम्माननीय शख्सियतें अंतिम संस्कार में शामिल हुए जिसमें प्रथम, ब्रिटेन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का अंतिम संस्कार देश में आधी सदी से अधिक समय बाद पहली बार किसी का राजकीय अंतिम संस्कार हुआ। इससे पहले 1965 में पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल को राजकीय सम्मान के साथ विदा किया गया था। जिसमें भारतीय माननीय राष्ट्रपति सहित करीब दो हज़ार मेहमान, 500 विदेशी महानुभाव, 4 हज़ार से अधिक कर्मचारी और संभवतः दुनिया भर में देखने वाले अरबों लोग। महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय का राजकीय अंतिम संस्कार 21वीं सदी का ऐसा अभूतपूर्व आयोजन हुआ,जिसकी तुलना नहीं की जा सकेगी। दूसरा, जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे का स्टेट फ्यूनरल (राजकीय अंतिम संस्कार) टोक्यो में हुआ। इसमें दुनियाभर के 217 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने के लिए टोक्यो पहुंचे। भारत के प्रधानमंत्री ने भी टोक्यो पहुंचकर आबे को अंतिम विदाई दी। ये दुनिया का सबसे महंगा अंतिम संस्कार बताया जा रहा है। इसमें 97 करोड़ रुपये खर्च हुए। चूंकि इन अंतिम संस्कारों में शामिल होने माननीय राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसी शख्सियत गई हैं, तो देश भर का ध्यान आकर्षित हुआ इसलिए आज हम भारत और इन देशों के अंत्येष्टि की सामाजिक मान्यता रीतिरिवाज राजकीय अंत्येष्टि के प्रोटोकॉल मान्यताएं विभिन्न नियम पर मीडिया में उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे।
बात अगर हम अंत्येष्टि यानें अंतिम संस्कार की करें तो, अंतिम संस्कार में आमतौर पर एक अनुष्ठान शामिल होता है जिसके माध्यम से पार्थिव शरीर को अंतिम स्वभाव प्राप्त होता है। संस्कृति और धर्म के आधार पर, इनमें या तो पार्थिव शरीर का विनाश शामिल हो सकता है (उदाहरण के लिए, दाह संस्कार या आकाश में दफनाना ) या इसका संरक्षण (उदाहरण के लिए, ममीकरण या हस्तक्षेप द्वारा )। स्वच्छता और शरीर और आत्मा के बीच के संबंध के बारे में अलग-अलग विश्वास अंत्येष्टि प्रथाओं में परिलक्षित होते हैं। एक स्मारक सेवा (या जीवन का उत्सव) एक अंतिम संस्कार समारोह है। एक अंतिम संस्कार एक पार्थिव शरीर के अंतिम स्वभाव से जुड़ा एक समारोह है, जैसे कि दफन या श्मशान , परिचर अनुष्ठानों के साथ। अंत्येष्टि के रीति-रिवाजों में एक संस्कृति द्वारा मृतकों को याद करने और उनका सम्मान करने के लिए उपयोग की जाने वाली मान्यताओं और प्रथाओं का परिसर शामिल है, जिसमें विभिन्न स्मारकों , प्रार्थनाओं और उनके सम्मान में किए गए अनुष्ठान शामिल हैं। अंत्येष्टि के लिए सामान्य धर्मनिरपेक्ष प्रेरणाओं में शोक शामिल है।
बात अगर हम हिंदू धर्म में अंत्येष्टि की करें तो,हिन्दू धर्म में अन्त्येष्टि को अंतिम संस्कार कहा जाता है।यह हिंदू धर्म काआखिरी याने 16 वां संस्कार है। मान्यता है कि अगर पार्थिव शरीर का विधिवत अंतिम संस्कार किया जाता है तो जीव की अतृप्त वासनायें शान्त हो जाती हैं। पार्थिव शरीर, इस दुनिया की सभी मोह माया को त्यागकर पृथ्वी लोक से परलोक की तरफ कूच करता है। बौधायन पितृमेधसूत्र में अंतिम स्ंस्कार के महत्व को बताते हुए ये कहा गया है कि जातसंस्कारैणेमं लोकमभिजयति मृतसंस्कारैणामुं लोकम्। इस अर्थ होता है कि जातकर्म आदि संस्कारों से व्यक्ति पृथ्वी लोक पर जीत हासिल करता है और अंतिम संस्कार से परलोक पर विजय प्राप्त करता है। अत: गर्भस्थ शिशु से लेकर मृत्युपर्यंत जीव के मलों का शोधन, सफाई आदि कार्य विशिष्ट विधिक क्रियाओं व मंत्रों से करने को संस्कार कहा जाता है। हिंदू धर्म में सोलह संस्कारों का बहुत महत्व है। वेद, स्मृति और पुराणों में अनेकों संस्कार बताए गए है किंतु धर्मज्ञों के अनुसार उनमें से मुख्य सोलह संस्कारों में ही सारे संस्कार सिमट जाते हैं इनसंस्कारों के नाम है- (1) गर्भाधान संस्कार, (2) पुंसवन संस्कार, (3) सीमन्तोन्नयन संस्कार, (4) जातकर्म संस्कार, (5) नामकरण संस्कार, (6) निष्क्रमण संस्कार, (7) अन्नप्राशन संस्कार, (8) मुंडन संस्कार, (9) कर्णवेधन संस्कार, (10) विद्यारंभ संस्कार, (11) उपनयन संस्कार, (12) वेदारंभ संस्कार, (13) केशांत संस्कार, (14) सम्वर्तन संस्कार, (15) विवाह संस्कार और (16) अन्त्येष्टि संस्कार।
बात अगर हम मुस्लिम धर्म में सुपुर्द-ए-खाक की करें तो, ख़ाक का अर्थ होता है मिट्टी व सुपुर्द ए का अर्थ उसके हवाले करना, अर्थात मिट्टी के हवाले करना या मिट्टी में समाहितकरना। सामान्यतः यहूदी, इसाई व इस्लाम धर्म में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसका अंतिम संस्कार मिट्टी में दफन करके किया जाता है। इसी प्रक्रिया को उर्दू व फ़ारसी भाषा में सुपुर्द-ए-ख़ाक बोलते हैं। सुपुर्द-ए-खाक का संबंध मृत्यु से है, जिसका अर्थ है जमीन मे मिल जाना। मृत्यु के बाद जब शव को कब्र मे डाल दिया जाता है तो अमुक व्यक्ति सुपुर्द ए खाक हो जाता है। सुपुर्द-ए-खाक का मतलब है किसी मृत इंसान के पार्थिव शरीरको कब्रखोदकर जमीन में दफना देना यह प्रथा मुस्लिम समाज में की जाती है।
Lबात अगर हम दो दिन पूर्व हुए जापानी व्यक्तित्व के अंतिम संस्कार की करें तो,क्यों अब ढाई महीने बाद हुआ अंतिम संस्कार? दरअसल आठ जुलाई को शिंजो आबे की हत्या हुई थी। इसके बाद परिवार ने बौद्ध परंपरा के अनुसार 15 जुलाई को उनका अंतिम संस्कार कर दिया था। अब जो स्टेट फ्यूनरल यानी राजकीय अंतिम संस्कार हुआ है वो सांकेतिक है। इसमें आबे की अस्थियों को श्रद्धांजलि के लिए रखा गया था। आबे की अंतिम विदाई के लिए दुनियाभर के 217 देशों के प्रतिनिधि पहुंचे हैं। इस दौरान लोगों ने आबे से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को साझा किया। भारत के प्रधानमंत्री भी इसके लिए जापान पहुंचे थे । शिंजो आबे पीएम मोदी के अच्छे दोस्तों में से एक रहे हैं।
बात अगर हम भारत में राजकीयअंत्येष्टि की करें तो, राजकीय अंत्येष्टि’ के साथ किए जाने वाले अंतिम संस्कार में पार्थिव शरीर तिरंगे में में लपेटा जाता है। दिवंगत व्यक्ति के सम्मान में मिलिट्री बैंड शोक संगीत बजाते हैं और इसके बाद उन्हें बंदूकों की सलामी दी जाती है। आजाद भारत में राजकीय सम्मान के साथ पहला अंतिम संस्कार महात्मा गांधी का किया गया था। (नोट- राष्ट्रीय ध्वज को केवल मिलिट्री स्टेट/ सैन्य/ केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों के अंतिम संस्कार में अनुमति दी जाती है। राष्ट्रीय ध्वज को किसी अन्य निजी अंतिम संस्कार में लपेटना अपराध है।)नियम के मुताबकि सिर्फ वर्तमान और पूर्व राष्ट्रपति, मौजूदा प्रधानमंत्री, वर्तमान केंद्रीय मंत्री की ही इस तरह से अंत्योष्टी की जाती है। लेकिन फिर भी इसके बारे में कहीं लिखित रूप से कोई प्रावधान नहीं है और समय के साथ इस नियम में कई बदलाव हुए हैं। किसी इंसान के लिए ‘राजकीय’ अंतिम संस्कार का आदेश देना सरकार का विशेषाधिकार है। मदर टेरेसा, सत्य साईं बाबा और श्रीदेवी जैसे ग़ैर राजनीतिज्ञों को भी राज्यकीय अंत्येष्टि दी गई।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि, अंत्येष्टि सुपुर्द-ए -खाक अंतिम संस्कार या अंत्येष्टि क्रिया हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से आखरी संस्कार है। जापान और ब्रिटेन में हाल में हुए अंतिम संस्कार नें दुनिया का ध्यान खींचा। हर देश में अंत्येष्टि का अपना प्रोटोकॉल मान्यताएं व सामाजिक रीति रिवाज है।
— किशन सनमुखदास भावनानी

*किशन भावनानी

कर विशेषज्ञ एड., गोंदिया