राजनीति

मनमानी पर अंकुश की जरूरत 

यहॉं में बात कर रही हूॅं , महाराष्ट्र से जुड़ने वाले उस महामार्ग की जो की वर्ष 2022 में आदरणीय नितिन गडकरी जी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में बन कर तैयार हुआ और वर्ष 2022 में ही जिसका उद्घाटन आदरणीय मोदी जी के कर-कमलों के द्वारा हुआ था । इस महामार्ग को नाम दिया गया समृद्धी अर्थात तरक्की, बढ़ोतरी पर ये क्या समृद्धि महामार्ग तो अपने ही नाम के विपरित दिशा में अग्रसर हो रहा है । मतलब की यहॉं समृद्धि तो हो रही है आर्थिक दृष्टिकोण से परंतु घटोती भी काफी दर में हुई है , अब आप सभी ये सोच रहे होंगे की मेरे लिखे भाव शब्द फालतू की बकवास है , पर ऐसा नहीं है जरा मेरी नज़रों से निहारें तो आपको समृद्धि के साथ-साथ घटोती का भी आभास होगा , घटोती देश कि आर्थिक उन्नति में नहीं बल्कि घटोती हो रही है उस हर एक परिवार के सदस्यों में से एक या अनेक की जिसकी समृद्धि महामार्ग पर यात्रा के दौरान हुए हादसे में मृत्यु हो गई ।  अब आपको समझ आई कि मैं‌आखिर क्या कहना चाहती या किस ओर ध्यान आकर्षित करना चाहती हूॅं आप सभी का ? 

वर्ष 2022 में बहुत ही पवित्र भाव और देश के हित को ध्यान रखते हुए साथ ही जनता को सफ़र के दौरान लगने वाले अधिक समय की बचत के लिए इस स्मृद्धि महामार्ग का निर्माण कार्य को पूर्ण कर विमोचन किया गया । बहुत ही खुशी का माहौल था तब , खुशी की बात तो आज भी है । परंतु फिर भी खुशी के पंखों को क्षण भर में जो खबरें काट देती हैं वो ख़बर है आए दिन समृद्धि महामार्ग में होने वाली जानलेवा दुर्घटना की । अभी तीन दिन पहले ही खबर पढ़ी थी कि एक घर का चिराग इस महामार्ग की सूली पर बलि चढ़ गया आज पुनः घर पर आने वाले दैनिक अखबार मे चौबीस घंटे में छः लोगों की दुर्घटना में चढ़ि बलि की खबर पढ़ी तो इस खबर ने मुझे झकझोर के रख दिया । अरे कब तक आखिर देश के इस महामार्ग में इंसानों कि बलियां इसी तरह चढ़ती रहेगी । क्या इस समस्या का कोई भी समाधान नहीं है ? जिस तरह महाराष्ट्र राज्य में विभिन्न शहरों को जोड़ जनता के समय बचाने के हित में समाधान समृद्धि महामार्ग के रूप में मिला था ठीक उसी प्रकार कोई तो समाधान निकाले हमारे देश को सुचारू रूप से चलाने वाले वरिष्ठ अधिकारी । हम सभी तो वरिष्ठ अधिकारियों के लिए हर एक फैसले को सहसम्मान मानते हैं जिस तरह परिवार का बच्चा अपने जनक के साए में रह कर उसी पर विश्वास रख उसकी ऊंगली पकड़ पहला कदम रख चलता है उसे यकीन है कि उसके जनक उसे गिरने नहीं देंगे तो हमारे देश को चलाने वाले , जो हमारे जनक के समान हैं वो कैसे अपनी जनता के हित में कोई समाधान नहीं लाए अब तक । क्या जनक अपनी संतान को इस तरह मरने दें सकते हैं ? 

मानती हूॅं , हमारे जनक अर्थात हमारे देश के अधिकारी हमें समय-समय पर गाइड लाइन दे रहे हैं । आगाह के संग आग्रह भी कर रहे की वाहन धीरे चलाएं , वाहन की गति सीमा भी तय की है । परंतु देश कि जनता नादान हैं या सही तौर पर कहें तो आज कि युवा पीढ़ी जो कि रफ ड्राइविंग को अपनी शान समझते हैं । ऐसे नवयुवा समझाने व विनम्र आग्रह पर नहीं समझ पाऐंगे वो सभी के भावों को । नवयुवाओं का भी दायित्व बनता है कि सरकार द्वारा समृद्धि महामार्ग के प्रयोग करने की गाइड लाइन को यात्रा पर निकलने से पहले अच्छी तरह पढ़ लें । इतने साफ-साफ सरल शब्दों में समझाया गया है कि चालक गण गाड़ी की रफ्तार १२० से अधिक नहीं रखें फिर भी चालक गण या ये कहें की नवयुवा अपने दोस्तों या अन्य लोगों के समक्ष अपने आपको जताने या इठलाते हुए बहुत ही गति देते हुए गाड़ी चलाते हैं ये गति १५० गति से भी अधिक होती है जिसके चलते मोड़ आने पर या सामने से आ रही गाड़ी को देख भी नियंत्रण खो बैठता गाड़ी की गति से और फिर क्या हो जाते हादसे का शिकार वो भी भयावह हादसा जो देखने वाले की रूह को कंपा दे । एक नियम यह भी है कि हर पचास से सौ किलोमीटर की यात्रा तय होने पर बीच-बीच में अपने वाहन में लगे चक्कों (पहियों) का निरीक्षण करें या करवाएं ताकि रोड और गाड़ी के चक्कों में होने वाले घर्षण से हवा का दबाव कहीं फैल नहीं गया पर अन्य इस तरह की बहुत सी सावधानियों को रखते हुए सिर्फ अपने मौज नहीं बल्कि सभी का ध्यान रखते हुए वाहन चलाते हुए अपनी यात्रा को बीच-बीच में विराम देते हुए खुशी से सफल बनाते हुए गंतव्य स्थान पर पहुंचना चाहिए । यहां हमारी भी तो जिम्मेदारी बनती है की नहीं ? सरकार ने हमारी और देश कि खुशहाली के लिए समृद्धि मार्ग का निर्माण करवाया न की दिखावे और अपने आपको गाड़ी चालक के रूप में श्रेष्ठ तेज गतिवान चालक जाहिर कर अपनी मनमानी के लिए । अपनी जिम्मेदारी भी समझें आम जनता । खैर मुझे नहीं लगता की जनता समझाने पर भी कुछ समझ पाएगी ये जनता उस अबोध बालक की तरह है जिसे कभी-कभी कड़े नियम सख्ती से समझाना पड़ता है । इस लिए देश की सरकार से ही अनुरोध है कि कोई ऐसी तरकीब या कोई कड़ा कदम उठाए ताकि देश की शान कहे जाने वाले समृद्धि महामार्ग पर होने वाले भयावह हादसों पर नियंत्रण किया जा सके यदि अभी ध्यान नहीं दिया तो कहीं ऐसा ना हो जाए कि समृद्धि महामार्ग हादसों के शिकार नामक मार्ग से न जाना जा सके । बच्चे कहें या जनता कहें जो समझें आप देश के वरिष्ठ पदाधिकारी आप को घर को सुचारू रूप से सही निर्णय लेना ही पड़ेगा । ताकी जिस आर्थिक उद्देश्य से महामार्ग का निर्माण हुआ वही उद्देश्य कायम रहे । विशेष आग्रह । 

— वीना आडवाणी तन्वी

वीना आडवाणी तन्वी

गृहिणी साझा पुस्तक..Parents our life Memory लाकडाऊन के सकारात्मक प्रभाव दर्द-ए शायरा अवार्ड महफिल के सितारे त्रिवेणी काव्य शायरा अवार्ड प्रादेशिक समाचार पत्र 2020 का व्दितीय अवार्ड सर्वश्रेष्ठ रचनाकार अवार्ड भारतीय अखिल साहित्यिक हिन्दी संस्था मे हो रही प्रतियोगिता मे लगातार सात बार प्रथम स्थान प्राप्त।। आदि कई उपलबधियों से सम्मानित