कविता

मैं अपनी मंजिल पा ही लूंगा 

यकीन है अपनी मेहनत पर,

सपनों को सच कर ही लूंगा। 

मैं अपनी मंजिल पा ही लूंगा।

बुलंद हौसलो के दम पर, 

उन्नति के शिखर को छू ही लूंगा।

मैं अपनी मंजिल पा ही लूंगा। 

राह चाहे कांटो से बिछी हो,

उन कांटो पर चल ही लूंगा।

मैं अपनी मंजिल पा ही लूंगा।

परिस्थितियां चाहे कैसी भी हो, 

उन परिस्थितियों से लड़ ही लूंगा।

मैं अपनी मंजिल पा ही लूंगा।

राहों में मुश्किलें लाखो आएंगी, 

उन मुश्किलों को पार कर ही लूंगा।

मैं अपनी मंजिल पा ही लूंगा।

जीवन मे चुनौतियां कई आएंगी,

चुनौतियों का सामना कर ही लूंगा।

मैं अपनी मंजिल पा ही लूंगा।

— श्याम सुंदर साहू

श्याम सुन्दर साहू

राजिम गरियाबंद (छ. ग.)