गीतिका/ग़ज़ल

तुम्हारी ऐसी-तैसी

बहुत हुआ अपमान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
कपटी,झूठिस्तान,तुम्हारी ऐसी-तैसी।

जो खुद हिंदू नहीं,खड़ा हो संसद में,
पेल रहा है ज्ञान,तुम्हारी ऐसी-तैसी।

भारत के दुश्मन को खुश कर जाता है,
मंदबुद्धि, नादान,तुम्हारी ऐसी-तैसी।

भ्रष्टों के सहयोगी, आतंकी के प्रिय,
खल के कृपा निधान,तुम्हारी ऐसी-तैसी।

सत्य-सनातन शत्रु, राम के अवरोधी,
बन मत बहुत सुजान,तुम्हारी ऐसी-तैसी।

भारत मां से प्रिय क्यों तुमको चीन लगे,
पूंछे हिंदुस्तान,तुम्हारी ऐसी-तैसी।

हिंदू मारे जाएं तो चुप्पी साधो,
गैर मरें तो तान,तुम्हारी ऐसी-तैसी।

संविधान को धीरे-धीरे बदल दिए,
अब बन रहे महान,तुम्हारी ऐसी-तैसी।

ना बंगाल दिखा,ना भागे तमिलनाडु,
बेच दिया ईमान,तुम्हारी ऐसी-तैसी।

बिगड़े बाबा का तो नाम लिया होता,
बन करके इंसान,तुम्हारी ऐसी-तैसी।

जाति-जाति को लड़वाकर रोटी सेंके,
चमचों के भगवान,तुम्हारी ऐसी-तैसी।

— सुरेश मिश्र

सुरेश मिश्र

हास्य कवि मो. 09869141831, 09619872154