लघुकथा

विश्वास किस पर ?

चुनाव अभियान पूरे जोर शोर से चलने के बाद प्रचार रुक चुका था. घर घर संपर्क के तहत एक निर्दलीय प्रत्याशी द्वारा सैकड़ों वोटें अपने पक्ष में मतदान करने के लिए खरीदी जा चुकी थी. शपथ दिलवा कर व पैसे वितरण कर मतदाताओं से उनके वोटर पहचान –पत्र ले लिए गए. उनसे कहा गया था कि अगले दिन मतदान के लिए जाते समय प्रत्याशी के पोलिंग बूथ से अपना पहचान –पत्र लेकर मतदान केंद्र में तराजू के सामने वाला बटन दबाएँ. सारे वोटर पहचान –पत्र बूथ वाईज सूची बनाकर प्रत्याशी के मुख्य चुनाव कार्यालय ‘ग्रीन हाउस’ में रखवा दिए गए. अब प्रत्याशी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हो गया था.

अगले दिवस मतदान होना था. किसी तरह यह समाचार लीक हो गया. चुनाव अधिकारी से निदेश मिलने पर पुलिस ने रात 12 बजे ‘ रेड ‘ की तैयारी की. सी आई डी के माध्यम से ‘ रेड ‘ का समाचार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पास ‘ एक्सक्लूसिव कवरेज ‘ करने के लिए पहुंच गया. मीडिया का वह पत्रकार संयोग से उसी प्रत्याशी का मीडिया प्रभारी भी था. जो सुरक्षा व कवरेज के नाम पर प्रत्याशी से पहले ही एक मोटी रकम वसूल कर चुका था.

समाचार मिलते ही उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कराहट फ़ैल गई. उसने तुरंत प्रत्याशी को इस बारे में सूचित किया. आनन फानन में ग्रीन हाउस से सभी वोटर पहचान पत्र व भारी भरकम फालतू राशी हटवा कर कहीं और रखवा दी गई. पुलिस द्वारा तय समय पर ‘ रेड ‘ की गई. रात बारह बजे ‘ रेड ‘ के वावजूद भी पुलिस को वहां से कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिल पाया.  प्रत्याशी सोच रहा था कि इस बार मीडिया पर किया गया उसका खर्च बहुत ही सार्थक रहा.

— विष्णु सक्सेना

विष्णु सक्सेना

पिता - स्व ;महाशय विशम्बर दयाल माता -स्व ;श्रीमती कौशिल्या देवी जन्म -26 जनवरी 1941 ,दिल्ली शिक्षा -,डी एम् ई आनर्स रूडकी विश्वविद्यालय 1964 सम्प्रति -सेवा निवृत डिप्टी चीफ इंजिनियर एच एम् टी पिंजोर ; अब स्वतंत्र लेखन ; राज्य श्रेष्ठ कृति -बैंजनी हवाओं में [काव्य संग्रह ] भाषा विभाग हरियाणा द्वारा [1972] ;अक्षर हो पुरुस्कार तुम [खंड काव्य ] हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा 2014 ; पुरुस्कृत कहानियाँ -वापसी [1996] ,चमक आत्म सम्मान की [1997] ,मुक्ति एक बोन्जाई की [1999] तीनो कहानियां हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पुरुस्कृत लघु शोध प्रबंध -विष्णु सक्सेना –व्यक्तित्व व कृतित्व [1998] कुसुम लता द्वारा :कहानीकार विष्णु सक्सेना [2004] अनीता नयन द्वारा : अक्षर हो तुम में मानव मूल्य [2017] कृषण चंदर द्वारा ; सभी कुरुषेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा से एम् फिल के लिए स्वीकृत सम्मान -राष्ट्रीय हिंदी सहस्त्राब्दी सम्मान [2000] मानव संसाधन मंत्रालय नई दिल्ली : व अन्य सम्पादन -कलादीप [लघु पत्रिका ]1973 से 1975 तक :चित्रांश उदगार [एकता अंक ]सितम्बर 1997 मौलिक कृतियाँ -काव्य संग्रह –बैंजनी हवाओं में 1976, गुलाब कारखानों में बनते हैं 1995,धूप में बैठी लड़की 2010 .सिरहन सांसों की 2013 :खंड काव्य –अक्षर हो तुम 2013 ,सुनो राधिके सुनो 2021 : कहानी संग्रह _बड़े भाई 1995 ,वापसी 2003 : लघु कथा संग्रह _एक कतरा सच 2018 सम्पर्क -एस जे 41 , शास्त्री नगर ,गाज़ियाबाद 201002 उ प्र : मो - 9896888017 ई मेल -vishnusaxena26@yahoo.com