गीत/नवगीत

सुविधाओं के भोग में

आई लव यू वाक्य ने, यूथ किया बर्बाद।
सुविधाओं के भोग में, कैसे बने फौलाद?
पढ़ने की क्षमता घटी।
मोबाइल लड़की पटी।
कक्षा में भी गेम हैं,
बन रहे देखो हठी।
यू-ट्यूब बस देखकर, बनना चाहें कणाद।
सुविधाओं के भोग में, कैसे बने फौलाद?
पढ़ना-लिखना छोड़कर।
अपनों से मुहँ मोड़कर।
गर्लफैण्ड से चेट कर,
चाँद लायेंगे तोड़कर।
चाउमीन भक्षण करें, खाते नहीं सलाद।
सुविधाओं के भोग में, कैसे बने फौलाद?
प्रेम बहुत हल्का किया।
एक से ना भरता जिया।
बलात्कार के केस कर,
चाह रहीं, देखो पिया।
पति से बस धन चाहिए, प्रेमी से औलाद।
सुविधाओं के भोग में, कैसे बने फौलाद?
लिव इन में, रहना इन्हें।
विधर्मी ही भाते जिन्हें।
बहत्तर टुकड़ों में काटकर,
फेंका जाता है उन्हें।
सेल्फी ही बस सेल्फ है, कैसे हों आबाद?
सुविधाओं के भोग में, कैसे बने फौलाद?

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)