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अंतस् अनवरत यात्रा करते हुए छठे वर्ष के अंतिम पढ़ाव पर- 71वीं काव्य-गोष्ठी संपन्न

“यूँ लग रहा है,जैसे आमने-सामने बैठकर ऑफलाइन गोष्ठी चल रही हूँ, एक-एक नगीना खोज के जोड़ दिया इस गोष्ठी की माल में”- अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में हापुड़ से शामिल प्रसिद्द शिक्षाविद् एवं विज्ञानवेत्ता, शायर, सिद्ध संचालक श्री महेश वर्मा ने कहा अंतस् की 71 वीं गोष्ठी में| गोष्ठी में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों को सराहते हुए महेश जी ने अपनी शुभकामनायें प्रेषित कीं|प्रसिद्द कवयित्री एवं योग ट्रेनर श्रीमती रजनीश गोयल की मधुर सरस्वती वंदना, ‘शुक्र है भगवान तेरा, सांसें दीं, जीवन दिया/सींच कर अपने लहू से माँ ने मुझ को तन दिया’ से गोष्ठी का शुभारम्भ हुआ| अंतस्-अध्यक्ष प्रसिद्द कवयित्री डॉ पूनम माटिया के संयोजन-सञ्चालन गोष्ठी में लगभग दस-बारह कवि-कवयित्रियों ने शानदार काव्य-पाठ किया और सदैव की भांति कई सुधि श्रोताओं ने साथ रह सभी का उत्साहवर्धन करते हुए काव्य-रस का आनंद लिया|
कवयित्री श्रीमती वंदना कुंअर रायज़ादा के अशआर(लोग हर पल तनाव देते हैं/अपने बन करके घाव देते हैं)बहुत पसंद किये गए| श्री महेश वर्मा ने माँ को समर्पित रचना(बिना बोले मिरे, हर चीज़ अम्मा बांध देती है/ हिदायत अनगिनत,तज्वीज़ अम्मा बांध देती है/ ज़माने की बुरी नज़रों से मुझको डर नहीं लगता/दुआओं के कई तावीज़ अम्मा बांध देती है) से वाहवाही लूटी| श्री दिनेश चन्द्र श्रीवास्तव ने समाज की नब्ज़ पकड़ते हुए पढ़ा(मंदिर और शिवाले दिखते सुखी और संपन्न/ रोटी और निवाले केवल दिखते आज विपन्न। धर्मकोष उतराकर बहता धोता सबके पाप/ साल रहा है बहुसंख्यक को उदर मध्य नवताप)| श्रीमती पूनम ‘सागर’ ने नए कलेवर की पंक्तियाँ पढ़ीं(प्रेम मिला न रहे अधूरे तुम ‘उ’ के जैसे सिमट गए/ प्रेम शब्द में ‘र’ के जैसे ‘प’ के पैरों में लिपट गए।’ऐ’ के जैसी प्रेम पताका जग में फहर नहीं पाई/ ‘मैं’ के जैसे ‘म’ पे ऐंठकर अहंकार में निपट गए)|अपनी उम्दा ग़ज़ल में श्रीमती निधि भार्गव ‘मानवी’ ने पढ़ा(घर में तेरे भी तो इज़्ज़त के तराशे हैं बदन/ बोली औरत की सर-ए-आम लगाने वाले)|संगीत के शिक्षक राम लोचन ने पढ़ा(मिटेगा न जब तक अहंकार ‘लोचन’ /दिखेगी कहाँ सादगी की निशानी)|डॉ नीलम वर्मा ने भी अपनी हाज़िरी ग़ज़ल के माध्यम से लगाई(शम्अ की चश्म अंधेरों पे नज़र रखती है/ साज़िशों का भी पता घर के चराग़ाँ से मिला)|अंतस् के संस्थापक महासचिव श्री दुर्गेश अवस्थी ने अपनी प्रचलित पंक्तियों(तेरी आवाज़ मैने सुनी जब कभी / तेरा हर शब्द हर वाक्य पूजा लगे/ देखता हूं कभी जब ये तेरे नयन/ इक नयन शुभ लगे लाभ दूजा लगे) और एक गीत से श्रोताओं का मन मोहा|सुगठित, रोचक सञ्चालन के अतिरिक्त पूनम माटिया ने अपने शीघ्र आने वाले ग़ज़ल-संग्रह ‘शजर पे चाँद उगाओ’ से उन्वानी ग़ज़ल पढ़ी(दिखाई देते नहीं हैं मुहब्बतों के समर/ शजर पे चाँद उगाओ बड़ा अँधेरा है| ख़मोश हैं ये फ़िज़ायें कि मन भी बोझिल है/ सुख़नवरों को बुलाओ बड़ा अँधेरा है)| कई कवि-शायर और काव्य-रसिक जैसे श्रीमती सोनम यादव, श्रीमती पूजा श्रीवास्तव, श्री कँवल कोहली अंतस् के संरक्षक श्री नरेश माटिया भी बतौर श्रोता शामिल रहे|

डॉ. पूनम माटिया

डॉ. पूनम माटिया दिलशाद गार्डन , दिल्ली https://www.facebook.com/poonam.matia poonam.matia@gmail.com