कविता

नशा

नशा, अफीम, चरस, गांजा, तंबाकू का हो, 

धन-वैभव, सत्ता, पद, सफलता का हो।।

लक्ष्य पाने का नशा हमारा संबल हैं,

नशीली दवा बर्बादी का निमंत्रण हैं।।

नशे पर नियंत्रण संकल्प से करना होगा,

युवा पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभाव से बचाना होगा।।

तन मन होता रोगी, बिखरता घर परिवार, 

धन-इज्जत लुटेरा नशा, जाने समझदार।।

नशा मुक्ति अभियान चले जोर-शोर से,

बचाना होगा समाज को नशाखोरी से।।

नशे का जो कर रहे व्यापार, खेल घिनौना,

खोखली होती शक्ति, विचार, विवेक बौना।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८