क्षणिका पहाड़ *ब्रजेश गुप्ता 03/07/202504/07/2025 पहाड़ों पर इतना बोझ बढ़ गया सोचने पर मज़बूर हो गए पहाड़ चलो हम ही क्यों न उतर आये नीचे की ओर