गुरु का मार्गदर्शन
गुरु कथन है श्री मद्भागवत गीता के ज्ञान सा,
विचलित मन को जो बॉंधे मजबूत बॉंध सा,
ज्ञान वो पतवार भव से पार लगाती नाव सा,
जीवन संघर्षों में आस के दिव्य प्रकाश सा ।
गुरु बन श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया,
मन को विचारों के आवागमन से मुक्त किया,
जीवन रहस्य को गीता में पूर्ण समाहित किया,
मुश्किलों में विवेकशील हो पथ चुनने को दिया ।
कहॉं से आया हैं जीव, क्या हैं जन्म प्रयोजन,
कैसे परमतत्व से हो मिलन रिश्तों में प्रबन्धन,
संचित कर्म भार का कैसे हो शीघ्रता से दोहन,
पथ सरल होता जब संग होते “आनंद” गुरुजन ।
गुरु का मार्गदर्शन व अनुभव बढ़ाता है उजास,
संकटों में भी संकल्पित मन न खोता है आस,
होता सात्विक विचारों का प्रति पल ही निवास,
कड़ी वो बनती परमात्मा से मिलन की मिठास ।
जीवन की मुरझाई कलियॉं खिल जाती हैं,
जब गुरु कृपा ईश कृपा संग मिल जाती हैं,
अनसुलझे सवालों का उत्तर मिल जाता हैं,
जीवन को गतिशील हो ध्येय मिल जाता हैं ।
— मोनिका डागा “आनंद”
