तेरे डिंपल में सुकून मेरा
तेरे डिंपल में कैद है मेरा सारा सुकून,
तुम पास आओ तो सुकून भी पा जाऊं,
भटकता फिरा हूँ जिस सुकून को ताउम्र,
खुशी का वह बीज पनपे तो खुशी पा जाऊं!
बेइंतहा प्यार है तुमसे, कैसे तुझे बताऊं,
प्यार है नाम एहसास का, महसूस करो,
काश तुम भी मुझे याद करे मेरी ही तरह,
सुकून के लिए मेरी यादों में आहें तो भरो!
चांद की छिटकी छटा, मन हुआ मदमस्त,
चांद में भी नजर आता है प्रिये तेरा डिंपल,
आनंद की छाए घटा, हर्षित हो सृष्टि समस्त!
जो तुम सामने आओ, मुस्कुराए तेरा डिंपल!
तेरे डिंपल में कैद सारा सुकून, ज़िन्दगी मेरी…!
तू ही मेरा ज़मीं-आसमां तू ही है, जुनून मेरा,
आओ मिलकर, जिंदगी के साथ मुस्कुराते हैं,
खुशियाँ बांटें, संतुष्टि पाएं, मुक्त हो सुकून मेरा!
— लीला तिवानी
