उपन्यास अंश

रघुवंशी भरत – प्रस्तावना

हमारे पौराणिक इतिहास में ‘भरत’ नाम के कम से कम चार महापुरुष हुए हैं- एक, ऋषभदेव या आदिनाथ के पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भरत, जो जड़भरत के नाम से विख्यात हुए और जिनके नाम पर हमारे देश का नाम ‘भारत’ पड़ा है। दूसरे, अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र एवं श्री राम के छोटे भाई भरत, तीसरे, नृत्यकला के आचार्य ऋषि भरत, जिनके नाम से भरतनाट्यम् नामक नृत्यविधा आज भी प्रचलित है और चौथे, इन्द्रप्रस्थ के राजा दुष्यन्त एवं शकुन्तला के पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भरत, जो कौरवों-पाण्डवों के पूर्वज थे।

इस छोटे से उपन्यास में हम श्री राम के भाई भरत के महान् चरित्र का चित्रण कर रहे हैं। हमने पहचान के लिए उनको ‘रघुवंशी भरत’ कहा है, क्योंकि श्री राम आदि सभी भाई अयोध्या के सम्राट रघु के वंशज थे। वाल्मीकि रामायण तथा अन्य रामायणों में भरत जी के चरित्र का उल्लेख किया गया है। हम वाल्मीकि रामायण को आधार मानकर इस लघु उपन्यास का लेखन कर रहे हैं।

इस उपन्यास को एक धारावाहिक के रूप में लिखा जाएगा और इसकी एक कड़ी हर तीसरे दिन अर्थात् एक दिन छोड़कर लगायी जायेगी।

सभी पाठक बन्धुओं से निवेदन है कि इसमें होने वाली त्रुटियों से मुझे अवगत करायें, ताकि उनको दूर किया जा सके और उपन्यास को रोचक तथा त्रुटिहीन बनाया जा सके।

जय श्री राम !

— डॉ. विजय कुमार सिंघल

श्रावण कृ. 1, सं. 2082 वि. (11 जुलाई, 2025)

डॉ. विजय कुमार सिंघल

नाम - डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’ जन्म तिथि - 27 अक्तूबर, 1959 जन्म स्थान - गाँव - दघेंटा, विकास खंड - बल्देव, जिला - मथुरा (उ.प्र.) पिता - स्व. श्री छेदा लाल अग्रवाल माता - स्व. श्रीमती शीला देवी पितामह - स्व. श्री चिन्तामणि जी सिंघल ज्येष्ठ पितामह - स्व. स्वामी शंकरानन्द सरस्वती जी महाराज शिक्षा - एम.स्टेट., एम.फिल. (कम्प्यूटर विज्ञान), सीएआईआईबी पुरस्कार - जापान के एक सरकारी संस्थान द्वारा कम्प्यूटरीकरण विषय पर आयोजित विश्व-स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में विजयी होने पर पुरस्कार ग्रहण करने हेतु जापान यात्रा, जहाँ गोल्ड कप द्वारा सम्मानित। इसके अतिरिक्त अनेक निबंध प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। आजीविका - इलाहाबाद बैंक, डीआरएस, मंडलीय कार्यालय, लखनऊ में मुख्य प्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) के पद से अवकाशप्राप्त। लेखन - कम्प्यूटर से सम्बंधित विषयों पर 80 पुस्तकें लिखित, जिनमें से 75 प्रकाशित। अन्य प्रकाशित पुस्तकें- वैदिक गीता, सरस भजन संग्रह, स्वास्थ्य रहस्य। अनेक लेख, कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य, कार्टून आदि यत्र-तत्र प्रकाशित। महाभारत पर आधारित लघु उपन्यास ‘शान्तिदूत’ वेबसाइट पर प्रकाशित। आत्मकथा - प्रथम भाग (मुर्गे की तीसरी टाँग), द्वितीय भाग (दो नम्बर का आदमी) एवं तृतीय भाग (एक नजर पीछे की ओर) प्रकाशित। आत्मकथा का चतुर्थ भाग (महाशून्य की ओर) प्रकाशनाधीन। प्रकाशन- वेब पत्रिका ‘जय विजय’ मासिक का नियमित सम्पादन एवं प्रकाशन, वेबसाइट- www.jayvijay.co, ई-मेल: jayvijaymail@gmail.com, प्राकृतिक चिकित्सक एवं योगाचार्य सम्पर्क सूत्र - 15, सरयू विहार फेज 2, निकट बसन्त विहार, कमला नगर, आगरा-282005 (उप्र), मो. 9919997596, ई-मेल- vijayks@rediffmail.com, vijaysinghal27@gmail.com