लघुकथा

ये हुई न बात

अर्पिता का पहला प्रेम योग था और वह अपना योग स्टूडियो चला रही थी, लेकिन 22 साल की उम्र में एक हादसे ने उसको हमेशा के लिए व्हील चेयर का मोहताज कर दिया. इस हादसे के बाद पहली बार वह दोस्तों के साथ आउटिंग के लिए निकली. लोगों का उसे अजीब निगाहों से देखना उसको खराब लगना ही था! तभी एक बुजुर्ग ने उसके कंधे पर हाथ रखकर धीरे से कहा- “बेटी, आप बहुत मजबूत हो, कि इस हालत में भी दुनिया का सामना करने के लिए बाहर आई हो”. इन्हीं शब्दों के जादू से वह इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में बतौर फिजिकल ट्रेनर और योग इंस्ट्रक्टर काम कर रही है. आज वह सफल एथलीट है और समर्पण से योग व काउंसिलिंग के जरिए दूसरों की जिंदगी भी रोशन कर रही है.
उसके समर्पण को देखकर सब कहते हैं- ये हुई न बात!

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244