कथा साहित्यकहानी

विह्स्की विला – भाग 5

ज्वाइस की कही बात ने मुझे किस कदर राहत पहुंचाई थी ये लफ़्ज़ों में बयां करना मुमकिन नहीं था। करवट लेकर मैने अपना मुंह ऊपर किया और ख़ामोशी से ज्वाइस को देखने लगा।
मेरे गाल को अपनी लाल – नर्म दायीं हथेली से सहलाते हुए बोली ‘समरीन मैडम के लिए इतना दुःख आपको ?’
‘क्या तुम्हे अपनी मॉम की मौत का कोई अफ़सोस और दुःख नहीं ?’ ज्वाइस की उस हथेली को जो मेरे गाल को सहला रही थी उसे अपने दोनों हाथ में लेकर हलके – हलके दबाते हुए मैने पूछा था।’
‘दुःख, दुःख तो नहीं है पर अफ़सोस जरूर है। गालव किसी की भी मौत पर अफ़सोस होना ही चाहिए। और फिर आपकी समरीन मैडम ने तो हमें पैदा किया था तो लाज़िमी है की पर उनकी बेटी को अफ़सोस हो।’
ज्वाइस की बात का मैं कोई जवाब दे पाता उससे पहले ही वो वापस बोल उठी ‘चलो निकलना है।’
‘निकलना है, कहाँ के लिए ?’
‘इन्स्पेक्टर से मिलने नहीं चलना ?’ मेरे बचकाने सवाल का जब ज्वाइस ने जवाब दिया तो मैं उठकर चलने के लिए तैयार हो गया।
मुझ पर एक नजर सरापा डालने के बाद ज्वाइस ने कहा ‘गालव मैने डैड को खोया है, आपको किसी कीमत पर खोना नहीं चाहती इसलिए आपके चेहरे, शरीर और बातों से उस खुर्राट इन्स्पेक्टर को कोई शक नहीं होना चाहिए।’
मैने मुस्कराकर गर्दन हिलाई तो ज्वाइस के होठों पर भी मुस्कान खिल उठी। स्निग्ध मुस्कान।
गाड़ी में बैठकर जब मैने इंजन स्टार्ट किया तो बगल में बैठी ज्वाइस ने पूछा ‘गालव आपने बैक डोर से विह्स्की विला में घुसने से पहले केयर तो रखा न। आई मीन CCTV केमरा वगैरा का।’
‘यस ऑफकोर्स माई स्वीट हार्ट मैने विहस्की विला के बैक डोर के गार्ड को ट्रेप किया और फिर उसे बिना पता लगे अंदर गया, जबकि वहां पीछे का CCTV केमरा आपके इस खाकसार की वजह से पिछले तीन दिन से काम नहीं कर रहा है।’
‘मेरी बात सुनके ज्वाइस मुस्कराकर बोली आपकी इन्ही खूबसूरत आदाओं पर ही तो मैं मर मिटी थी।’
ज्वाइस की बात सुनके मैं थोड़ा संजीदा हो उठा था। कुछ देर मेरी संजीदगी की वजह की थाह लेने के बाद ज्वाइस ने मुझसे पूछ ही लिया था ‘गालव क्या हुआ, क्या आपको लगता है मैं आप पर नहीं मरती,मीन्स आपसे प्यार नहीं करती ?’
‘नहीं नहीं ज्वाइस ऐसी कोई बात वो तो तुमने जब कहा तुम मेरी अदाओं पर मरती हो तो मुझे समरीन मैडम का जिस्म याद आ गया जो मरने के बाद बेजान हो गया था।’
‘आप पर मरते – मरते वो मर ही गईं।’ कह कर ज्वाइस ने एक लम्बी स्वांस भरी और फिर अपनी निगाहें सड़क पर लगा दीं।
गाडी एक्सलेटेरटर पर मेरे पाँव की दबाव की वजह से पुलिस स्टेशन की तरफ़ दौड़ी जा रही थी।
‘क्या तुम्हे अपनी मां की बात का कोई गम नहीं ?’ मैने कुछ देर पहले ज्वाइस से जो पूछा था उसे वापस दोहराया था।
‘उसने TH के साथ मिलके मेरे डैड का मर्डर किया था।’ ज्वाइस ने कहते वक़्त सिर्फ एक पल मुझे देखा और फिर अपनी आँखें सड़क की और सीधी कर लीं।
ज्वाइस के पापा का मर्डर हुआ था ये मुझे पहली बार पता चल रहा था। सुनके मैं खामोश हो गया, ज्वाइस के लिए दिल में प्यार और हमदर्दी दोनों में इजाफा हो गया।
मुझे खामोश देख कर ज्वाइस बोली ‘TH के पास बेशुमार दौलत का होना मेरे पापा के मौत की वजह बनी। TH ने अपनी दौलत की नुमाइश करके पहले मॉम को अपने प्यार में फसायां और फिर हममजहबी होने का वास्ता देकर मॉम को पापा के क़त्ल के लिए राजी कर लिया। मेरी बचपन की आँखों ने अपने पापा का बेजान जिस्म देखा था।’ ज्वाइस ने कह कर आँखें बंद कर।’
‘तुम्हारे पापा के लिए मुझे बहुद दुःख है।’ मेरी बात पे ज्वाइस चुप रही थी।
‘क्या तुम्हारे पापा मुस्लिम नहीं थे ?’
‘क्रिश्चियन थे।’ इस बार ज्वाइस ने जवाब दिया था।
–सुधीर

सुधीर मौर्य

नाम - सुधीर मौर्य जन्म - ०१/११/१९७९, कानपुर माता - श्रीमती शकुंतला मौर्य पिता - स्व. श्री राम सेवक मौर्य पत्नी - श्रीमती शीलू मौर्य शिक्षा ------अभियांत्रिकी में डिप्लोमा, इतिहास और दर्शन में स्नातक, प्रबंधन में पोस्ट डिप्लोमा. सम्प्रति------इंजिनियर, और स्वतंत्र लेखन. कृतियाँ------- 1) एक गली कानपुर की (उपन्यास) 2) अमलतास के फूल (उपन्यास) 3) संकटा प्रसाद के किस्से (व्यंग्य उपन्यास) 4) देवलदेवी (ऐतहासिक उपन्यास) 5) माई लास्ट अफ़ेयर (उपन्यास) 6) वर्जित (उपन्यास) 7) अरीबा (उपन्यास) 8) स्वीट सिकस्टीन (उपन्यास) 9) पहला शूद्र (पौराणिक उपन्यास) 10) बलि का राज आये (पौराणिक उपन्यास) 11) रावण वध के बाद (पौराणिक उपन्यास) 12) मणिकपाला महासम्मत (आदिकालीन उपन्यास) 13) हम्मीर हठ (ऐतिहासिक उपन्यास) 14) इंद्रप्रिया (ऐतिहासिक उपन्यास) 15) छिताई (ऐतिहासिक उपन्यास) 16) सिंधुसुता (ऐतिहासिक उपन्यास) 17) अधूरे पंख (कहानी संग्रह) 18) कर्ज और अन्य कहानियां (कहानी संग्रह) 19) ऐंजल जिया (कहानी संग्रह) 20) एक बेबाक लडकी (कहानी संग्रह) 21) हो न हो (काव्य संग्रह) 22) पाकिस्तान ट्रबुल्ड माईनरटीज (लेखिका - वींगस, सम्पादन - सुधीर मौर्य) पुरस्कार - कहानी 'एक बेबाक लड़की की कहानी' के लिए प्रतिलिपि २०१६ कथा उत्सव सम्मान। ईमेल ---------------sudheermaurya1979@rediffmail.com