हरियाली तीज (छोटी तीज)
बागों में झूला झूले सब हिल मिल नाचे गाऍं,
आओ सखी हरियाली तीज का उत्सव मनाऍं ।
माता गौरा के तप से भोलेनाथ हुए थे जब प्रसन्न,
सावन शुक्ल तीज बरसा नभ से अमृत घनन घनन,
हर्षित हो सभी देवी-देवताओं ने भी बरसाऍं सुमन,
महेश्वर को अति प्रिय तब से हुआ ये माह सावन,
इस हरियाली तीज की महिमा सभी को सुनाऍं,
आओ सखी हरियाली तीज का उत्सव मनाऍं ।
सोलह श्रृंगार कर पाऍं शोभा सुंदर जैसे दुल्हन,
उपवास रख करें अपनी परम्पराओं का निर्वहन,
कथा कहकर चित् मन करें शिव-शक्ति का पूजन,
मॉं महादेव से आशीर्वाद पाकर होवे सुख सम्पन्न,
अखंड सुहाग का वर शंकर-पार्वती से हम पाऍं,
आओ सखी हरियाली तीज का उत्सव मनाऍं ।
झूमके पायल बिछियॉं चूड़ियॉं करें मीठी खनखन,
हरा परिधान व हरित श्रृंगार कर खुश होऍं सुहागन,
श्रद्धा से व्रत रख क्वारी भी पाऍं मनभावन सजन,
सभी करें एक दूसरे का सहर्ष “आनंद” अभिनंदन,
अनुपम आशीष बड़ों का व छोटों का प्यार पाऍं,
आओ सखी हरियाली तीज का उत्सव मनाऍं ।
दिखाकर हाथ सबको खुशी से झूम रहा मन,
आया रंग प्यारा मेहंदी का चटकीला मनहरन,
पति और पत्नी की सूझ-बूझ से खिलता जीवन,
अनूठा प्रेम पवित्र रिश्ता ये पवित्र रस्मों का बंधन,
सप्तपदी के गठबंधन को और भी मजबूत बनाऍं,
आओ सखी हरियाली तीज का उत्सव मनाऍं ।
बागों में झूला झूले सब हिल मिल नाचे गाऍं,
आओ सखी हरियाली तीज का उत्सव मनाऍं ।
— मोनिका डागा “आनंद”
