एक दीवानी
मेरी भी एक दीवानी होगी,
उसकी भी एक प्रेम कहानी होगी,
वो भी ख्वावों में मुझे संजोती होगी,
राह चलते टटोलती होगी,
कब मिलेगा मुझे वो,
यह सोचकर वह मुश्कराती होगी,
अगर सहेलिया पूछती होंगी,
कौन है वो? कैसा है वो..!!
यह सुनकर वह शर्माती होगी,
ये कष्ट वो कब तक सहेगी,
मुझसे मिलने के दिन वो कब तक गिनेगी,
काश् कोई ऐसा संयोग बन जाए,
वो मुझसे मिल जाए,
और उसका वियोग कम हो जाए..!!
मेरी भी एक दीवानी होगी,
उसकी भी एक प्रेम कहानी होगी.!!
— प्रशांत अवस्थी “रावेन्द्र भैय्या”
