चेतावनी
ऐ मन तू सुन ले, मेरी चेतावनी
बस बहुत हो गई तेरी मनमानी
अब मेरा कहना, तुझे सुनना होगा
जो मैं कहूं, वही करना होगा।।
अपनी ही मारी तू चलाता सदा
सन्मार्ग से मुझे, भटकाता रहा
अब मेरे साथ ये, सब चलेगा नही
जैसा मैं कहूं तू बस, करेगा वही।।
पहले भी कई बार तुझे समझाया
भइया, मुनवा, कहकर बहलाया
मेरे दिल का हाल तक कह डाला
पर तुझको जैसे का तैसा पाया।।
सब्जबाग मुझे , दिखलाता रहता
फिरकी के माफिक नचाता रहता
एक इच्छा पूरी, होती नही
दूसरे की चाह, मन में भरता।।
जब तक न मांगू, रायमत देना
एक नया बखेड़ा,न शुरू कर देना
अपनी म्यान में ही, बस पड़े रहना
वर्नापड़ जाएगा, लेने का देना।।
सब समस्याओं की, जड़ तू ही है
ख्वाब नये रोज दिखाते रहता
जब पूर्ण न हमसे वह हो पाते
सुख-चैन ही सारा मैं गंवा पड़ता।
भूल हुई तुझ पर, काबू न पाया
तूने इसका खूब फायदा उठाया
संतुष्टि भाव कभी, जगनेन दिया
जैसे चाहा मुझे वैसे नचाया।।
आगे से अब मैं, दिल की सुनूंगा
तेरे आदेशों का न मान धरूंगा
दिक्कतें आती हैं, तो परवाह नही
तुझको मनमानी न करने दूंगा।।
— नवल अग्रवाल
