क्षणिका क्षणिकायें *ब्रजेश गुप्ता 03/08/202504/08/2025 हाँ में हाँ मिलाता रहा जैसा दिखाया वैसा देखता रहा आज जैसे ही उनके सत्य को असत्य बताया बर्षों का रिश्ता पल में टूट गया