हास्य व्यंग्य

किट्टी देवी की जय

किट्टी देवी तेरी सदा ही जय हो । ऐसा मुझे दे वरदान तेरी पार्टी में खेले जाने वाले हर गेम में मेरी ही सदा विजय हो। किट्टी देवी तेरा भला हो तेरी पार्टी में जाते ही हम मिडिल क्लास महिलाओं को एकदम से ही स्वर्ग जैसा अनुभव होने लगता है। जब से तू सोसाइटी में आई है हम मिडिल क्लास महिलाओं की तो जैसे किस्मत ही बदल गई है।
तेरे दरबार में पहुंच कर हमें ऐसा लगने लगता है जैसे हम इंद्र के दरबार में पहुंच गए हैं और सबसे अच्छी बात तो यह होती है कि वहां अप्सराएं
भी हम सभी महिलाएं ही होती है। शादी पार्टियां भला रोज-रोज कहां होती है इसी बहाने हमें महीने में काम से कम एक या दो तीन अपने गहने कपड़ों के प्रदर्शन करने का भरपूर मौका तो तुम हमें दे ही देती हो।
बहुत पहले मिडिल क्लास महिलाएं दोपहर में समय मिलने पर अपने घर का काम किया करती थी जैसे की बड़ी पापड़ वगैरह बनाना उसके बाद समय और थोड़ा सा बदला तब महिलाएं कपड़ों पर कसीदे करती थी स्वेटर बुनाई करती थी और भी न जाने कई तरह के हस्त कलाएं बनाकर अपना समय व्यतीत करती थी।
अब आ गया रेडीमेड का जमाना अब बच्चों को बनाई किए हुए स्वेटर पसंद आते हैं और ना ही पति इन्हें पसंद करते हैं अब उन का भी कोई रोल नहीं रहा अब तो उनसे केवल सजावटी चीजें ही बनाई जाती हैं। बड़ी और पापड़ बनाना भी किसी बड़े झंझट से कम वाला काम नहीं है अब यह भी करना हम सबको पसंद बिल्कुल भी नहीं है। नौकरी पैसा महिलाएं नौकरी करने चली जाती है और हम हाऊस वाइफ घर पर बोर होती रहती हैं। किट्टी देवी तेरा बहुत बड़ा सहारा हमको मिल जाता है 1 महीने में दो बार या एक बार भी हम महिलाएं एक साथ मिलजुल कर हंसी मजाक इसकी चुगली उसकी चुगली आदि करके अपना मनोरंजन करती है साथ ही साथ पकवानों का भी लुत्फ उठा लेती हैं,अब भला हमें और क्या चाहिए किट्टी देवी तेरी कृपा से हमें यह सब प्राप्त हो रहा है यह हमारे लिए किसी वरदान से काम नहीं होता।
हाई सोसाइटी की महिलाएं किसी क्लब का गठन करती हैं,जिसमें उन्हें चंद के रूप में कुछ पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं पर तेरी पार्टी में ऐसा कुछ भी नहीं करना पड़ता बल्कि यहां पर खेल खेलने पर पैसों की या पुरस्कारों की वृद्धि होती है हाऊजी रुपी जुए में भी बड़ा मजा आता है जीतने पर ऐसी प्रसन्नता होती है जैसे महाभारत के जुए में शकुनी मामा को हुआ करता था हार जाने पर थोड़ा सा हमारा मेकअप वाला चेहरा उतर जाता है पर कोई बात नहीं ,,हम समझ लेते हैं कि चलो जीवन में और खेल में हार और जीत तो चलता ही रहता है।
किट्टी देवी, तेरी ही वजह से हमने जाना कि सावन की हरियाली क्या होती है वरना हमें तो सावन में आने वाले त्योहारों के लिए पकवान बनते-बनते ही सावन कब भादों में बदल जाता था, पता ही नहीं लगता था। तू ही हमें ब्रह्मांड सुंदरी विश्व सुंदरी से ना सही पर हरियाली और सावन सुंदरी के खिताब से नवाजती है तो हम स्वयं को किसी विश्व सुंदरी या ब्रह्मांड सुंदरी से कम नहीं समझ पाते। और साथ ही जय हो मीडिया वालों का जो हमारी तस्वीर अखबार पर छाप कर हमें और भी पुलकित कर देते हैं साथ ही फेसबुक इंस्टाग्राम व्हाट्सएप पर भी हम छा जाती हैं तो मां कसम हमें कितनी खुशी महसूस होती है यह तो हम मिडिल
क्लास हाउसवाइफ सातवें आसमान पर पहुंच जाती हैं। नाम में हमें भले ही प्लास्टिक का साधारण सा टिफिन सेट या वाटर बोतल ही क्यों ना मिले पर कहा जाता है ना पुरस्कार तू पुरस्कार ही होता है। ऐसी साधारण सी चीज यदि हमारे कोई रिश्तेदार आकर दे तो हम मुंह बनाते हुए कहेंगे हु ,,,यह भी कोई देता है क्या? लेकिन वही साधारण चीज हमें पुरस्कार में मिले तो,,, किसी गोल्ड मेडल या किसी ट्रॉफी से कम नहीं लगती।
कुछ भी हो आजकल के जमाने में जब हम सब तरफ से अकेले पड़ जाते
और हां किटी देवी एक बात का मैं तुम्हें और धन्यवाद करना चाहती हूं कि अब तेरा आयोजन घरों में न होकर किसी होटल में भी होने लगा है वरना हम मिडिल क्लास गृहिणियों को होटल भी देखने को कहां मिलते थे तेरे ही बहाने से हम किसी रिसोर्ट ,वाटर पार्क या और भी ऐसी सुंदर जगह का दर्शन कर लेते हैं।
किट्टी देवी तेरी कृपा हम सब पर बनी रहे ।किट्टी देवी सदा सहाय।

— अमृता राजेंद्रप्रसाद

अमृता जोशी

जगदलपुर. छत्तीसगढ़