भारत का स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) एक प्रेरणा
भारत की आज़ादी की कहानी त्याग, संघर्ष और अदम्य साहस की एक महान गाथा है। अंग्रेजों ने 1757 में प्लासी के युद्ध के बाद इस देश में अपनी सत्ता कायम की और लगभग दो सौ वर्षों तक शासन किया। इस दौरान भारतवासियों ने अद्भुत साहस और धैर्य का परिचय देते हुए स्वतंत्रता के लिए कई आंदोलनों की शुरुआत की। सबसे पहला बड़ा विद्रोह 1857 में हुआ, जिसे “पहला स्वतंत्रता संग्राम” कहा जाता है।
इसके बाद कांग्रेस, मुस्लिम लीग और अन्य राष्ट्रीय संगठनों ने जनता में राजनीतिक चेतना और एकता की भावना पैदा की। महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और “भारत छोड़ो” आंदोलन जैसी ऐतिहासिक लड़ाइयों ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। इस संघर्ष में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई , सभी समुदायों ने कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया। लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल की यातनाएँ सही, अपने प्राणों की आहुति दी और बलिदान के अमर उदाहरण कायम किए।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश शासन कमजोर हो गया और अंततः उन्होंने भारत छोड़ने का निर्णय लिया। हालांकि, विभिन्न कारणों और मतभेदों के चलते देश का विभाजन भी हुआ। 15 अगस्त 1947 को मध्यरात्रि में भारत स्वतंत्र हुआ। इसी दिन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा फहराया और ऐतिहासिक “ भाषण दिया।
हर वर्ष 15 अगस्त को हम स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं। इस दिन तिरंगा लहराया जाता है, शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है और हमें उन बलिदानों की याद दिलाई जाती है जिनकी बदौलत हमें आज़ादी मिली।
स्वतंत्रता दिवस हमें सिखाता है कि आज़ादी किसी एक समुदाय या व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे भारतवासियों की साझा और अनमोल धरोहर है। इसे संजोना, सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह सहज
