कविता

श्री कृष्ण

मेरी हर प्रार्थना
का आगाज़ तुम्ही से
और अंज़ाम भी श्रीकृष्ण
तुम्हीं पर समर्पित,
जीना मोहक बनाया मोहन ने
देकर गीता का यह अमृत उपदेश,
ग़र मन में कुछ भर के जिएंगे
तो मन भर के ना जी पाएंगे
होते कामयाब वही अक्सर जीवन में
सोच अपनी से जो जहां बदलते हैं !
वक़्त करवाता अपनों का एहसास
भेद ये भी बतलाया योगेश्वर ने,
बेशक अपनो के साथ बिताया
वक़्त पता नहीं चलता
किंतु वक़्त के साथ होती है
जग में परख अपने और पराए की !
पथ कामयाबी का दिखलाया
तुम्ही ने माधव गाकर पावन गीत,
कर्म करें बिन फल लोभ के
खुश रहें सदा अपनों के साथ
बेशक दूजों में हस्ती न हो हमारी
पर अपनों के लिए होतें हैं ख़ास !

— मुनीष भाटिया

मुनीष भाटिया

जन्म स्थान : यमुनानगर (हरियाणा) उपलब्धियां: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख एवं कविताएँ I प्रकाशन: चार कविता संग्रह एवं तीन निबंध संग्रह, तीन quote बुक्स राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की दस हजार से अधिक पत्र पत्रिकाओं में वर्ष 1989 से निरंतर प्रकाशन I 5376, एरोसिटी, ऍफ़ ब्लाक, मोहाली -पंजाब M-7027120349 munishbhatia122@gmail.com