श्री कृष्ण
मेरी हर प्रार्थना
का आगाज़ तुम्ही से
और अंज़ाम भी श्रीकृष्ण
तुम्हीं पर समर्पित,
जीना मोहक बनाया मोहन ने
देकर गीता का यह अमृत उपदेश,
ग़र मन में कुछ भर के जिएंगे
तो मन भर के ना जी पाएंगे
होते कामयाब वही अक्सर जीवन में
सोच अपनी से जो जहां बदलते हैं !
वक़्त करवाता अपनों का एहसास
भेद ये भी बतलाया योगेश्वर ने,
बेशक अपनो के साथ बिताया
वक़्त पता नहीं चलता
किंतु वक़्त के साथ होती है
जग में परख अपने और पराए की !
पथ कामयाबी का दिखलाया
तुम्ही ने माधव गाकर पावन गीत,
कर्म करें बिन फल लोभ के
खुश रहें सदा अपनों के साथ
बेशक दूजों में हस्ती न हो हमारी
पर अपनों के लिए होतें हैं ख़ास !
— मुनीष भाटिया
