नया दौर
पुराना दौर गया अब नया दौर आया है
आधुनिकता की भाग दौड़ में सब कुछ बिखराया है
संस्कृति, संस्कार भूल गए बदल गए जिंदगी के मायने है
रिश्तों में न रही प्रेम,मधुरता, कटुपन आया है
एक दूसरे की सफलता से जलते नहीं रखते उनका मान है
हर चेहरे के पीछे छिपे रूप कहीं अनेक है
नये दौर में बदला सब कुछ सब फैशन के पीछे है
परिवार साथ रहा करते जब अब एकल का दौर है
किसी को किसी परवाह नहीं सब पैसों का खेल है
मान,सम्मान कोई करता नहीं रुतबे को देखते है.
— पूनम गुप्ता
