कविता

वो आ गया है

आंधियों की आड़ में
बारिशों की बाढ़ में
धर्म की स्थापना करने
समझो वो आ गया है

काल का महाकाल बनकर
भक्तों की ढाल बनकर
जन्म से ही संघर्ष का
पाठ पढ़ाने वो आ गया है

देर थी अंधेर नहीं
पुकार की शक्ति दिखाने
गीता का ज्ञान देने
समझो वो आ गया है

अपने मुख में ब्रह्मांड समाए
बंसी की धुन पर संसार नचाए
प्रेम को परिभाषित करने
समझो वो आ गया है

उसकी शरण में जो
है साथ उसके वो
सारे विकार मिटाने मन के
समझो वो आ गया है

कालचक्र अपने अधीन करके
कर्म-धर्म का मार्ग दिखाने
अधर्मियों को दंडित करने
समझो वो आ गया है

अटूट विश्वास बचाने
विधि का विधान बताने
सांसारिक बंधन मुक्त करने
समझो वो आ गया है

ना अस्त्र में ना शस्त्र में
एक निराकारी वस्त्र में
अलौकिक शक्ति के रूप में
हृदय में समझो वो आ गया है

— सौम्या अग्रवाल

सौम्या अग्रवाल

पता - सदर बाजार गंज, अम्बाह, मुरैना (म.प्र.) प्रकाशित पुस्तक - "प्रीत सुहानी" ईमेल - soumyaagrawal2402@gmail.com